Wednesday, April 15, 2020

चार्ली चैप्लिन

पहली तस्वीर को पहचान लीजिये। यह वोह चेहरा है जो हैरान परेशान लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कहीं छुप गया ।हमारे ज़ख्मो पर मरहम रखता रखता गुम हो गया ।हमे हमारे मतलब का चेहरा याद रह गया।इनसे सीखें की कैसे तलवार उठाए बिना,चीखें चिल्लाए बिना भी अपने अंदर छुपे हुनर से बड़ी से बड़ी सल्तनत को जवाब दिया जा सकता है। महसूस कीजिये कैसे किसी दर्द में डूबे दिल को मुस्कान की छाँव में लाया जा सकता है।जब ज़ुल्म इन्तेहा कर जाए तब वह एक रास्ता बनाते हैं। जब इंसानियत टुकड़ो टुकड़ों में बट जाए तब उनके जैसे किरदार खुद को मिटाकर टूटे दिलों को जज़्बात से जोड़ते हैं।

यहाँ तक हमे हमारे ग़म भुलाने के लिए इन्होंने जो चेहरा अपने खूबसूरत चेहरे पर ओढ़ लिया,मैं सोच कर हैरान हूँ की वह किस तक़लीफ़ से गुज़रे होंगे। उस चेहरे को अपनाना जिस चेहरे के विरुद्ध ही लड़ाई हो,बड़े जिगरे का काम है। उस मुखौटे को ओढ़ लेना,जिससे नफरत ही नफरत हो,कितना जिगरे का काम है ।जब आईने में अपनी सूरत देखते होंगे तो किस क़द्र दिल रोता होगा,मगर हर आँसू को ज़ब्त करके वह हमारे डूबे हुए दिलों को पार लगाते हैं ।

सबसे बड़ी बात तब और अब में है,उस वक़्त उनका जो दुश्मन था उसके मुकाबले का खूँखार आज कोई भी नही है मगर आज मैं अपने विरोधी का चेहरा तो छोड़िये नाम लेकर भी मज़ाक कर दूँ,तो टुकड़े टुकड़े कर दिया जाऊँ। कल जब वह मज़ाक करता था, तो जनता उनमे अपने दर्द देखती थी, आज दुनिया के किसी भी कोने में नेता का विरोध कीजिये तो आपके साथ कम लोग ही खड़े होंगे ।हाँ अगर कहीं  किसी दिमागी पिछड़े हुए देश में आपने उनके नेताओं की अक्षमता,क्रूरता,धूर्तता पर सवाल किये तो कहिये भीड़ आपको खींचकर ही मार डाले।पकड़ कर सलाखों में डाल दिया जाए।

आज 16 अप्रैल को अपने चार्ली चेपलिन के जन्मदिन पर याद कर लीजिये। मेरे तो इर्द गिर्द वही हैं,हो सके तो उनके उन किस्सों को याद कीजिये जिसमे वोह युद्ध के विरुद्ध या युद्ध में लोगों को मायूस न होने के रास्ते बुन रहे थे। आज एक बार फिर दुनियाभर में गुस्से और बदले की आग से भरे हुए लोग उभर आए हैं, आज फिर चार्ली बेहद अहम् हो गए हैं।हिटलर के विरुद्ध चार्ली चैप्लिन के विरोध का तरीका भी जानना,बताना और पढ़ाना चाहिए ।

यह भी देखिए चार्ली चैप्लिन भारत के किस शख्स के सामने सर झुकाने को तैयार थे,वह कौन भारतीय था जिसके लिए चार्ली चैप्लिन का दिल मोहब्बत से भर उठता था,जिसका किरदार चार्ली को रास्ता दिखाता था । जिससे मिलने में दुनिया के मशहूर एक्टर के चेहरे पर पसीना था कि।पता नही वह मिले भी या न और मिले तो क्या कहें । जब वह उनसे मिले तो माहौल ने इतना अपनापन ओढ़ लिया कि चार्ली ने सवाल किया कि आप मशीनों के खिलाफ क्यों हैं, उधर से जो उत्तर आया, उसे खुद खोजकर जानिए,क्योंकि उसने ही चार्ली को आगे का रास्ता दिखाया । चार्ली जिनको देख भर पाना चाहते थे ज़ाहिर है, वह एक ही महान आत्मा थी हिंदुस्तान की,मोहनदास करम चंद गांधी महात्मा गांधी । चार्ली और नेहरू की मुलाकात भी अहम है मगर इतना जानिए दुनिया की बड़ी शख्सियतें हमेशा एक दूसरे की इज़्ज़त करती थीं,जो अब नही रहीं,अब बड़े भव्य भव्य चमकदार झमकदार छोटे छोटे दिल के लोग ज़्यादा रह गए हैं,ऐसे में चार्ली को याद करना और ज़रूरी हो जाता है । आज जन्मदिन है, ढूंढिए,देखिये,पढ़िए और अपना रास्ता खुद बनाइये ।
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