Wednesday, April 29, 2020

इरफान खान

करोणों लोग इरफान की मौत पर ग़मज़दा हैं मगर हमे तो वह बीस पच्चीस ट्टपंजुहे ही दिख रहे हैं, जो खुश हो रहें ।।असल मे हम भी उन लोगों को ढूंढते हैं, जो हमारे गम में शामिल न हों और खुशी मनाए । हम उन करोणों लोगों की तरफ से मुँह फेर लेते हैं, जो आँसू बहा रहे हैं ।

ज़रा एकबार अपनी लिस्ट देखिये,अपने दोस्तों की संख्या देखिये की उसमे खुश होने वाले अधिक हैं या गम करने वाले अधिक है, हर हाल में ग़मज़दा लोग बहुत हैं और टटपंजुहे खुशी मनाने वाले गिनती के लोग हैं । सबकी वाल पर वही एक आध बेगैरत के स्क्रीन शॉट टहल रहे हैं, उन्हें करोणों लोग वह नही दिख रहे हैं, जो बेहद अफसोस कर रहे हैं ।

हम बार बार कहते हैं, गटर पर अपना वक़्त बर्बाद मत करो । 130 करोण में मुश्किल से लाख से भी कम गटर छाप मानसिकता के लोग होंगे,उनकी बात ही क्यों करों,गन्दे नाले रहेंगे और बहेंगे,वह भी समाज का हिस्सा हैं, हम बेहतर लोगों की बात करें न ।

और हाँ तुम्हे चीख कर कहना होगा कि जो मौत पर हँसे, वह मुसलमान नही है । जो मृत्यु में अवसर तलाशे वह हिन्दू नही है । इनकी मज़बूती यह है कि यह हिन्दू और मुसलमान की ढाल लिए फिरते हैं, जबकि यह ही अधर्मी हैं । मेरी नज़र में यह ही न मुसलमान हैं और न ही हिन्दू हैं, क्योंकि दोनों बनने के लिए इंसान बनना पड़ता है और यह इंसानियत से खारिज कीड़े मकोड़े भर हैं, इनपर अपना वक़्त बर्बाद मत करो ।

आज मुझे जितना ग़म है, उतना ही सुक़ून है कि दुनिया भर के करोणों लोग इरफान की कला से मोहब्बत करते हुए,बेहद गमगीन हैं । मेरे लिए यह लोग उदाहरण हैं, मैं इन भीगी आंखों की बात करूँगा । मैं इनके टूटे दिलों की आहट महसूस करूँगा । मैं इनके साथ गम में शरीक होकर खड़ा होऊँगा । उनकी बात ही क्या करनी जो इंसान ही नही बन पाए । इरफान ने जता दिया कि इंसानियत से भरा दिल हो और सच्ची योग्यता हो तो ज़माना सर झुका देता है ।

गटर पर ढक्कन डालें और सफर तय करें,जिसे इरफान हमारे लिए अधूरा छोड़ गए,इंसानियत का सफर,मोहब्बत का सफर,संघर्ष का सफ़र...
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