Sunday, April 5, 2020

यह नए नही हैं जननायक

देखिये प्रधानमंत्री की अपील पर लोग दीये जलाएँ या थाली बजाएँ, यह काम नए हो सकते हैं मगर तरीका नया नही है । हमारे देश मे जिस भी लीडर से जनता ने प्रेम किया है, उसकी एक आवाज़ पर अमल भी किया है, इसमें न ही नरेंद्र मोदी जी नए हैं और न ही पहले हैं, तमाम नेताओं के आह्वान पर पहले भी जनता इकट्ठा होती रही है ।खुशी है कि आज मोदी जी की आवाज़ वैसी ही कुछ कुछ जगह बना रही है ।

अविभाजित भारत में आज भी महात्मा गाँधी जैसी लोकप्रिय ताक़त नही पैदा हुई । गाँधी की आवाज़ क्या हिन्दू क्या मुसलमान,क्या पख्तून क्या बिहार,क्या बंगाल क्या मद्रास,सब तरफ एक साथ असर डालती थी ।उनकी एक आवाज़ पर लोगों ने खुशी खुशी अपने कीमती कपड़ों में आग लगाकर इसी ज़मीन पर होली खोली थी । वह तो सरकार में भी नही थे और न ही इस तरह मीडिया सोशल मीडिया था,मगर उनकी आवाज़ पर पूरा देश चल पड़ता था । हमारी जनता उनसे अथाह मोहब्बत करती थी ।

दूसरे लीडर आते हैं, आज़ाद भारत के पंडित जवाहर लाल नेहरू,जिन्होंने शुरू के ही भाषण में कहा कि इस आज़ाद हिंदुस्तान के मंदिर मस्जिद हैं, उद्योग,फैक्ट्री,बाँध, नहरें । जनता ने इन्हें मंदिर मस्जिद  मान लिया । अपने लीडर पंडित जी से मोहब्बत थी उसे,उसने उनसे नही कहा कि हमे मंदिर बनाकर दो,हमे मस्जिद बनाकर दो,उसने उनसे फैक्ट्री माँगी, उद्योग मांगें, ज़मीनें दी नहरे निकालने को,बड़े बड़े बाँध की नींव रखवाई । यह था अपने लीडर से प्रेम की उसकी बात को अपना भविष्य मान लिया और दुनिया के सामने सर उठाकर खड़ी हुई ।

फिर एक लीडर कम वक्त के लिए सामने आए,उनका नाम था लाल बहादुर शास्त्री । थोड़ा सा वक़्त और बड़ी पहचान । उन्होंने लोगों से अपील किया कि एक वक्त खाना खाएं,ताकि हमारी दूसरों पर निर्भरता न रहे । यक़ीन कीजिये,इस देश की जनता ने एक वक्त खाना खाना शुरू कर दिया । बिना मीडिया की चो चपड़,बिना सोशल मीडिया के आईटी सेल के इस लीडर की आवाज़ घर घर गई,यह थी अपने लीडर से मोहब्बत, उसके साथ खड़े होने की ललक ।

फिर आती हैं इंदिरा गाँधी । पूरे देश की आँखों मे वह तस्वीर आज भी नक़्श है, जब पाकिस्तान से युद्ध मे वह अपने ज़ेवर लिए हाथ मे खड़ी हैं । अपने सभी ज़ेवर सेना के लिए समर्पित करते अपने प्रधानमंत्री को देख,झड़ी लग गई मदद की । इंदिरा घर घर,दिल दिल मे पालथी मारकर बैठ गईं । जनता ने उनसे अथाह मोहब्बत की ।

इस बीच आते हैं एक फ़क़ीर, जिसकी पीठ पर गाँधी का थैला था । न वह कोई पद पर था,न वह कांग्रेस में थे,बस पैदल गाँव गाँव घूम रहे थे,एक ही चीज़ मांग रहे थे, जानते हैं क्या,ज़मीन । ज़मीन अमीरों से मांगकर गरीबो में देना,यानी भूदान । आप यकीन नही करेंगे,लोगों ने उनकी बात पर ज़मीनें दान दे दीं । हज़ारों एकड़ ज़मीन गांधी के आध्यात्मिक शिष्य विनोबा भावे के पैरों में डाल दीं । यह थी मोहब्बत,यह थे अपील,यह था करिश्मा,जो जनता ने किया ।

हम हमेशा जिस लीडर को भी प्रेम करते आए हैं, उसकी बातों को,उसकी अपील को दिल से भी मानते आए हैं । देखना तो यह है कि इस मोहब्बत का,इस लगाव का उस नेता ने इस्तेमाल कैसे किया है । हमसे काम कौन से लिये हैं । हमारे राष्ट्र को कितना आगे बढ़ाया है । हमारी आने वाली नस्लों के लिए सुनहरे ख्वाब की बुनियाद डाली है या नही । यह देश अपने लीडर को हमेशा सर आंखों पर बैठाता रहा है, इसमे कुछ भी नया नही है ।

वह भी तब, जब न मीडिया ऐसा था,न सोशल मीडिया था और न ही आई टी सेल थी । बस एक अपील थी और सब हाज़िर । यह दीये जलाना, थाली पीटना क्या है, लोगों ने अपने महँगे कपड़े जलाए,नरम कपड़े उतारकर खादी पहनी,मंदिर मस्जिद भूले,एक वक्त खाना छोड़ा, गहने बेचे,ज़मीनें दान की इसलिए घबराइए मत की अब यह कौन आ गया,जिसके कहने पर लोग दिन को रात और रात को दिन कह रहे हैं, मेहनत और दिमाग रखिये,आपको भी मौका मिलेगा । यह देख अतिउत्साहित भी मत होइए की यह पहली बार हो रहा है, बहुत पहले से होता आया है । हम तो उन मुट्ठी मुट्ठी भर वाले धार्मिक नेताओं की बात ही नही कर रहे जिन्होंने बोरे का टाट तक लोगों को पहनावा दिया था और लोगों ने पहना भी था ।

जिस भी लीडर से जनता प्रेम करेगी,उसकी हर बात को सर आँखों पर लेगी । यह हमारे ख़मीर में है । कोशिश कीजिये कि लोगों के दिलों में जगह बनाइये । उनसे स्नेह रखिये,उन्हें जीतने के प्रयत्न कीजिये । इनके बाद फिर कोई आएगा,जो जनता की मोहब्बत पाएगा । मुझे खुशी है कि जनता मोहब्बत से खाली नही हुई है । लीडर बनिये ।
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