Thursday, April 2, 2020

कोरोना और मुसलमान

एक भाई इनबॉक्स में घुसकर बोले,क़िदवई साहब अब जमात पर कुछ नही लिखेंगे,तबलीग़ के कोरोना डिस्ट्रीब्यूशन पर नही कुछ कहेंगे ।
हमने कहा भाई हम यहूदी हैं ।
वह बोले यह क्या होता है ।
हमने कहा यार यह तुम्हारे सिलेबस से बाहर की चीज़ है, तुम उतना ही सीखो,जितना टीवी पर प्रचारक सिखाए ।

ख़ैर यह बात हो गई मज़ाक की मगर गम्भीर बात यह है कि मुसलमान खुद को सुधारने के मौके के मौके गवाते जा रहें । जो बड़ी गलतियाँ दिल्ली मरकज़ से हुई हैं वह माफी के काबिल नही हैं, कोई भी सक्षम सरकार इनसे खुद बखुद निपट लेगी ।

हम फिर कह रहें कि अपनी कमियों पर पर्दे मत डालिये,बल्कि उन्हें सुधारिये । उनसे सीखिए,जो समाज को बढ़ाने में लगे हैं नाकि उनसे जो सिर्फ मज़हबी बातों को ही।फैलाना चाहते हैं । जो आपसे नफरत कर रहें या आपकी हरकतों से खिन्न हैं, उनके मन को भी तो टटोलिये । अगर खुद की तरफ से कमी दिखने लगें, तो उन्हें सुधार लें ।

मैं लिखना नही चाहता हूँ क्योंकि पिछले दस साल से एक ही बात तो लिख रहें हैं कि अच्छे इंसान बनो । मोहब्बत, खुलूस,खिदमतगार बनो । जिस लड़के ने इनबॉक्स किया,उससे मैं ज़रा भी विचलित नही,न ही उसके प्रभाव में लिख रहा हूँ । 

बस हाथ जोड़कर कह रहा हूँ कि अपनी आने वाली नस्लों के लिए खुद को सुधार लो । यह बहानेबाज़ी नही चलेगी की हिन्दू ऐसे हैं, ईसाई वैसे हैं, खुद को सुधारिये । विज्ञान पढ़िए,मौलानाओं को मस्जिद तक रखिये,दुनियावी सबक उससे मत लें,जिसे दुनिया का ही इल्म नही । कट्टर सियासत और कट्टर मज़हबी सोच,दोनों से किनारा कर लीजिए ।

आज लोग आपसे नाराज़ हैं, इससे बेचैन मत हों,बल्कि शीशे के सामने खड़े होकर सोचिए,की हममें क्या कमी हैं । मीडिया प्रचारक या नफरती लोग जो भी आपके विरुद्ध फैला रहें हैं, उसे गौर से समझिये और ऐसे काम कीजिये जिससे लोग आपको माफ कर सकें ।

हमे बहुत सफाई देने किसी का पसन्द नही,बस इतना कहेंगे कि मुश्किल वक़्त तो है, कुछ मुश्किल वक़्त आपपर लाया गया,तो बहुत कुछ मुशिकल हालात आपने अपनी हरकतों से कमाया भी है । हम तो ठहरे यहूदी,मगर आपकी फिक्र है । अगर गलियाँ साफ करनी पड़ें माशरे का दिल जीतने के लिए,तो साफ कीजिये । यह सज़ा नही बल्कि इम्तेहान है । मेरी बातें बुरी लगेंगी मगर सोचिए,रास्ता कोई और है नही,ख़िदमत ही एक रास्ता है जो पहाड़ जैसे दरवाज़ों को भी खोल देती है ।

जो आपको आज भला बुरा कह रहें, उनमें से सब बुरे नही हैं और न ही नफरत करने वाले हैं । वह दिल से चाहते हैं कि आप सुधरिये और बढ़िए । जो नफरत कर रहें,वह कल भी करते थे,कल भी करेंगे मगर जो नाराज़ हैं, उन्हें मनाया जा सकता है । मना लीजिये,जैसे भी करके हो,नाराज़ लोगों को बिना अगर मगर के भरोसा दिलाइये की आप सुधार करेंगे ।खुद से वादा कीजिये कि अच्छी पढ़ाई,वैज्ञानिक सोच,जागरूक नागरिक,दिल मे प्रेम,सहिष्णुता,समर्पण,त्याग और संवेदना लाकर आने वाली नस्लों के लिए शानदार दुनिया बनाएंगे । कट्टरपन और दकियानूसी बातों से बचिए,यक़ीन करें,हमारी मिट्टी हमारे आपके लिए पहले की तरह नरम होगी....
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