दो मित्र, दो कॉंग्रेसी, दो मुखर व्यक्तित्व, दो योद्धा और एक साझा इतिहास । बाएं ओर रामकृष्ण द्विवेदी जी हैं और दाई तरफ क्रांति कुमार जी । ताउम्र दोनों साथ रहे,चप्पलें घिस डाली काँग्रेस को जिलाए रखने में,अभी साल भी नही हुआ,गुज़री सर्दियों में क्रांति कुमार जी इस मित्र को अकेले छोड़ गए थे । मित्र रामकृष्ण जी को कहां विरह बर्दाश्त,आज वह भी इस ठहरी हुई दुनिया को छोड़कर अपने मित्र से जा मिले । चार पाँच महीने में दोनों मित्र अनन्त की ओर चले गए और रह गईं केवल यादें ।
रामकृष्ण द्विवेदी जी का जाना एक भरे पूरे इतिहास का गुज़र जाना है । जिसने भी पुरानी कांग्रेस के पर्दे उठाए हैं, उसमें कुर्सी पर बैठे रामकृष्ण जी ज़रूर दिखाई दिए होंगे । बिना उनके काँग्रेस की दो सफे भी लिखना मुश्किल होंगी ।
मेरे लिए कष्टकारी था जब पिछले दिनों काँग्रेस ने उन्हें निष्कासन का पत्र थमाया,रामकृष्ण जी के लिए तो पीड़ा थी ही मगर खैर हुआ कि राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व के दबाव में मृत्यु से पहले उनका निष्कासन खत्म किया गया और ससम्मान अपने बुजुर्ग को अपनी चौखट पर आखरी सांस लेने दिया गया ।
मेरी बातें अधूरी रह गईं । Surendra S Rajput जी से किये वादे भरभरा के ढह गए । रामकृष्ण जी और क्रांति जी से दर्ज करने वाली इतिहास की बातें उनकी आखरी सांस के साथ ठहर गईं । जीवन भर अफसोस रहेगा कि इतिहास जो लिखा जा सकता था,उसे लिखने से हम चूक गए । रामकृष्ण जी का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है कि हम जिये हुए इतिहास से समृद्ध हो सकते थे,मगर गरीब ही रह गए । काँग्रेस और उसके नए लोग पलट कर देखें कि इतने शानदार जीवन के तमाम उतार चढ़ाओ के साथी अच्छे बुरे वक्त में साथ तो खड़े थे,अब नही रहे । इनकी ज़ुबान साफ और खरी थी मगर वफ़ादारी इनमे इतनी पैबस्त थी कि आखरी सांस तक अपनी चौखट पर ही बैठे ।
कुछ संस्मरण हैं, जो लिखेंगे,कभी न कभी कह देंगे मगर एक वृहद बातचीत,दर्ज होने वाला इतिहास लिखने से रह गया,इसका मलाल ताउम्र रहेगा । श्रद्धांजलि लिखते हुए उंगली और मन दोनों कांप रहें,मगर क्या कहे,बस रामकृष्ण द्विवेदी जी,नमन,ॐ शांति !
#hashtag #हैशटैग
No comments:
Post a Comment