Monday, April 6, 2020

टीवी ही नही हर जगह से दूर रहो

मेरे एक जानने वाले थे,वह घर मे टीवी नही लगाए थे । कहते थे टीवी देखना गुनाह है मगर महंगे फोन रखे थे,उसमे गाने,वीडियो वगैरह देखा करते थे । अब कौन बताए कि इसी पर मुहावरा है, गुड़ खाएँ, गुलगुले से परहेज़ । यह मूर्खता ही तो है ।

ख़ैर इस बात से इशारा करना यह था कि जितने लोग भी इस दंगाई मीडिया और फ़सादी प्रचारकों से आजिज़ हैं । वह अक्सर कहा करते हैं कि वह न्यूज़ चैनल नही देखते मगर सिफत देखिये,इन न्यूज़ चैनल की कोई ख़बर उनकी आँखों से ओझल भी नही होती । अरे यह टीवी पर न देखने और सोशल मीडिया पर आंखे फाड़ फाड़ कर देखना उपरोक्त उदाहरण जैसा ही है ।

न्यूज़ नही देखते मतलब नही देखते । अंजना,अभिसार,सुधीर,रजत,रुबिका,पुष्पेंद्र जैसे प्रचारक क्या कर रहें,आपको मालूम ही नही होना चाहिए । किसने आपसे कहा कि आपको सब जानकारी मालूम होनी चाहिए । हमें गटर की जानकारी की आवश्यकता ही नही है, जिसे हो वह गटर में कूदे या कूदने का पैसा पाता हो,आपको मीडिया जैसे गटर की जानकारी रखने की क्या ज़रूरत है ।

मगर नही,आपको ट्विटर पर उन्हें पढ़ना है, फेसबुक पर उनको ढूंढना है, यूट्यूब पर उनके वीडियो देखने हैं फिर दिनभर गरियाना है । अरे यार जिसको देखना ही नही है, उसकी बात में वक़्त क्यों बर्बाद कर रहे हैं । उन्हें गंदगी,नफरत फैलाने के अलावा कुछ नही आता । वह बार आपको बतलाते हैं कि देखो जब हमारे पास हिन्दू मुसलमान एजेंडा नही होता है, तो हम खलिहार अंताक्षरी खेलते हैं ।

इनको मत देखिये,कहीं मत देखिये,इनपर बात भी मत कीजिये समझिये समाज की ऐसी गंदगी है यह जिसपर जितना बात की जाएगी,वह उतना फैलेगी । अपने परिवार,अपने भाई बहन,गरीब गुरबाओं,कमज़ोरों, परेशानहाल लोगों की तरफ दिमाग लगिये,उनकी मदद कीजिये । न हो सके तो अच्छी किताबें पढ़िए । दुनिया के बेहतरीन इंटरविव सुनिए,साइंस की स्टोरी पढ़िए,नए रिसर्च जानिए,जो नही आता है उसे सीखिए मगर ईश्वर के लिए उस तरफ से हट जाइये,जिधर से खर्च होने के सिवा हासिल कुछ न हो ।

मीडिया में अगर बहुत दिलचस्पी है, तो कुछ लोग बेहतर काम कर रहें,उनको पढ़िए । तमाम अखबारों के सम्पादक हैं,पत्रकार हैं उनको पढ़िए,सुनिए,उनकी बात कीजिये । इससे अच्छा मौका भले क्या होगा उन रिपोर्टर को पढ़ने समझने का जो ईमानदारी से पत्रकारिता कर रहे हैं । मैं बीसों ऐसे पत्रकारों के नाम गिना सकता हूँ जो वाकई ऐतिहासिक काम कर रहे हैं, उनको देखिये ।

पी साईनाथ तो एक नाम है, सैकड़ों हैं, खोजिए,उनपर बात कीजिये । कहाँ इन फ़ालतू लोगों पर ध्यान लगाए हैं । जिन्हें टीवी से ख़ुराक़ लेनी है, लेने दीजिये । उन्हें हम लोग किसी भी हाल में रोक नहीं पाएँगे ।वह सब मिटाकर लौटेंगे,उनकी फिक्र छोड़ दें,अपने ऊपर काम कीजिये । गुड़ और गुलगुले दोनों से परहेज़ कीजिये,जिन्हें टीवी पर नही देखना चाहते,उन्हें सोशल मीडिया पर भी मत देखिये और न ही उनकी बात कीजिये ।

जो हालात होंगे,उनसे निबटा जाएगा । बस अपने ऊपर मेहनत कीजिये । इस मीडिया से न हारने की ज़रूरत है न जीतने की,अपनी बात कहना सीखिए,उसमे दम और तर्क और सत्यता के साथ शोध बढ़ाइए । जिन्हें मीडिया पर तफरीह करनी हैं, वह करें,चलाएं शब्दबाण,इसका हासिल भी कुछ नही होगा । उनसे हटिये और अपनी कहानी लिखिए । जब कोई आप पर कलम न चलाए, तो खुद को ऐसी कहानी बना दो की ज़माना उसे बैठकर लिखे ।

अगर इस बात पर यकीन है कि हर नफरत आखिर में हारती ही है, तो उधर से मुँह फेरकर अच्छे कामो में लगो,उन्हें एजेंडा चलाने दो तुम आखरी सांस तक बेहतर काम करो । वह समाज बांटे या न बांटे तुम समाज को जोड़ते चलो । अपना लक्ष्य तय करो और उसे पाने में लगो । किसी स्टुपिड बॉक्स में बैठे स्टुपिड से खुद के लिए लक्ष्य मत लो । अपने मुल्क में मोहब्बत फैलाओ और जितना हो सके ज़रूरतमंद के काम आओ । 
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