देखो आगाह कर रहा हूँ।समझ लो।जब तुममे से किसी को लगने लग जाए की पढ़ाई से बेहतर कमाई है।पढ़ने से बेहतर काम है।तो समझ जाना तुम गुलामी की आखरी सीढ़ी पर हो।
जिस सम्प्रदाय में यह बात आम हो जाए की हमे पढ़ाई से कुछ नही मिलना।हमे बच्चों को काम देना है।वोह आज तो रोटी का जुगाड़ कर लेंगे।मगर कल उनके बच्चे,बच्चों के बच्चे,पढ़े लिखे सम्प्रदाय के शौचालय साफ़ करते मिलेंगे।यक़ीन न हो तो गर्दन घुमा कर देख लो।जो पीछे पाखानो में कोई दूसरे का टॉयलेट साफ़ कर रहा है,वही तुम्हारा आने वाला कल होगा,अगर तुमने किताबो से दूरी बना ली।ऐसे काम करवा कर तुम्हारी आत्मा।को मारा जाएगा।आत्मा अगर जीवित रह सकती है तो सिर्फ एक चीज़ से,वोह है।पढ़ाई।
मैं नही कहता की तुम पँचर मत जोड़ो।बिलकुल जोड़ो,मगर पढ़कर।तुम झाड़ू लगाओ,मगर पढ़कर।यह पढ़ाई सिर्फ इसलिए है ताकि तुम दिमाग से गुलाम मत बन पाओ।जब कभी कोई ठण्डी हवा का झोखा आए तो तुम उसे महसूस कर पाओ।कोई कभी तुम्हे उठाना चाहे,तो तुम्हारी रीढ़ मौजूद रहे,उठने के लिए।
हाँ मेरे दोस्त,यह पढ़ाई तुम्हारे जिस्म में रीढ़ की हड्डी की तरह है।इसे मज़बूत करो।हफ्ते में तीन दिन खाना खाओ मगर पढ़ो।यह झूठ है की भूखे पेट भजन नहीं होता।
भूखे पेट भजन हो सकता है।किया गया है।लोगो ने किया है।किसी बहकावे में मत आना खुद पढ़ो,बच्चों को पढ़ाओ।अगर थोड़ी हैसियत है तो अच्छे स्कूल में भेजो।ताकि बच्चों को हौसला आए।
जब तुम सब पढ़ लिख जाओगे।तभी तो उभरी हुई कमियों को ठीक कर पाओगे।तभी तो मुस्कुराओगे।तुम्हारी मुस्कान ही तो भारत है।भारत को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए पढ़ो।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Friday, October 21, 2016
पढ़ो
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hafeezkidwai
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