Monday, October 31, 2016

शादी शादी

वोह आते हैं घेरकर।आपके कद को देखते हैं।अपने से एक अँगुल निकलता पाते ही इत्मिनान की साँस लेते हैं।आपके उभरे हुए सीने को देखते हैं।उम्मीद और मज़बूत हो जाती है।चेहरे पर उगी दाढ़ी और मूँछ उन्हें उनके इरादों की भनक देती है।फिर आपकी वोह आँखे जो सालों से किताबों में खोई थीं।उनकी गहराई नापते हैं।अपनी पारखी आँखों से देखते हैं की यह कितना वज़न सह सकता है।आखरी कहें या पहली कहें,वोह चीज़ होती है आपकी तनख्वाह।उसका वज़न इन्हें रिझा देता है।यह तड़प उठते हैं।
तड़प कर यह बोलते हैं आखिर शादी कब कर रहे हो।यह रिश्तेदार होते हैं।दोस्त होते हैं।पड़ोसी या कहें टांग अड़ाऊ प्रजाति।इनका काम ही है एक बाप को बताना की उनका बेटा शादी लायक है।एक माँ को बताना की उसे अब बहु की ज़रूरत है।एक बहन को बताना की फ़िक्र करो।पता नही इनको क्यों लगता है की यह बड़े क़ाबिल लोग हैं।यह लड़के के दिमाग की नस के भीतर घुसकर सूँघ लेते हैं की इसे अब शादी कर लेनी चाहिए।
मुझे शादी की ज़रूरतों पर घेरने वाले से सख्त चिढ़ है।ज़रा देर इनके साथ बैठ क्या लो की यह सर पर चढ़कर पतंग उड़ाने लगते हैं।अलानी फलानी लड़कियों का भूगोल इन्हें याद है।
कमबख्त ज़िन्दगी की किसी मुश्किल पर नही फटके।कभी गणित के मुश्किल सवालों के हल न बता सके।कभी एक भी परिभाषा समझा नही सके।कविताओं के अर्थ के वक़्त यह अनर्थ में रहे।फ्यूचर के लिए कभी रौशनी के नाम पर अगरबत्ती भी नही दिखाई।सीवी तक बनाना नही बताया।एक शहर से दूसरे शहर ख़ाक छानने में भी वोह साथ नही आए।ज़िन्दगी के चार पल क्या सुकून के आए की बिछ पड़े,शादी करलो।
आप शादी कीजिये या न कीजिये,यह फैसला सिर्फ आपका होगा।न सामाजिक दबाओ का और ना लुभावने प्रयासों का।आप ज़िन्दगी के इन पलो को दबाव में मत लें।शादी तभी कीजिये जब दिल और दिमाग तैयार हो।कुछ को लगता है ज़िन्दगी के सारे रास्ते शादी तक ही जाते हैं।उनकी सोच को हवा में उड़ाइए और ज़िन्दगी को आगे बढ़ाइये।कुदरत की बनाई दुनिया को परत दर परत देखिये।घूमिये।दिमाग को खुलने दीजिये।यह शादी करवाने वाले लोगो से तो दूर ही रहें।ऐसे बेजा लोगो को नज़रअंदाज़ कर ज़िन्दगी का लुत्फ़ लें।

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