Tuesday, October 25, 2016

नुचा हुआ पैर

सड़क किनारे एक पैर पड़ा।नुचा हुआ इंसान का पैर।अंगूठा फूला हुआ ।नुचे हुए पैर में हिफाज़त का काला डोरा बंधा है।कच्चे धागे का डोरा है अगर पक्का होता तो यह पैर पड़ा नही बल्कि चल रहा होता।थोड़ा करीब जाने पर किनारे नाले में पूरा जिस्म दिखा।एक पैर शायद इंसान के लाश बनने की जल्दी में सड़क पर रह गया होगा।
पेट फूला हुआ ।इतना फूला की उसपर कव्वे आराम से चहलकदमी कर रहेे।उन्हें उसपर उचकने में मज़ा आ रहा है ।उचकते में उसकी बदन पर पड़ी चेकदार मैली शर्ट का बटन कव्वे के पैरों में बार बार फंस रहा।जब भी कोई कव्वे का पैर फंसता वोह शोर करता,उसके साथ सारे शोर करते और इस शोर में उसकी लाश की आवाज़,हाँ लाश की आवाज़ दब जा रही है।
करीब से देखा तो सर पानी में डूबा हुआ।नाक के ऊपर काई की हरी हरी परत ।पेट पर कुछ काले काले लाठियो के निशान हैं।लाठियों नहीं, शायद मोटे केबल के निशान होंगे,क्योकि वोह पौने चाँद की तरह उभरे हैं।सांवलेपन में भी उभरे चाँद पर जमी ख़ून की बूँद साफ़ नज़र आ रही हैं।बायाँ हाथ कुचला हुआ लगा।कुचली हुई हथेली और दूर पड़े पैर से कोई भी बता सकता है, खींचतान में पैर ने हार मान ली होगी।
बदन को पैर ने पहले छोड़ दिया।कँधे को देखकर लग रहा है की उसे खींच कर यहाँ फेका गया है।बगल में ही धान के खूबसूरत खेत में धान लहरा रहा है।फूले पेट में उगे बालों से लग रहा था की उम्र करीब पच्चीस छब्बीस रही होगा।दाएँ हाथ में रस्सी फंसी हुई है।रस्सी की मज़बूत पकड़ से कलाई से ख़ून टपक टपक के जम चुका है।लगा,जैसे अभी कोई उससे जानवर छीनकर गया हो।लगा जैसे जाते जाते वोह जानवर हो गया हो।लड़के की लाश पड़ी हुई है।गाय धान चर रहीं हैं।जानवरों का झुँड अपना काम करके पिछली रात ही जा चुका।
किसी को नही पता की लड़का कौन है।यह धान चरती गायों का मालिक कौन है।मगर सबको पता है की वोह जानवरों का झुँड कौन है।किस घर से है।हाँ,बहुत बार जानवर घरों में ही होते हैं।ऐसा जानवर जो शिकार तो करता है मगर खाता नही।ऐसा जानवर जो ख़ून तो बहाता है मगर पीता नहीं।उस जानवर को गलतफहमी हो जाती है की वोह इंसान है।तभी तो शिकार को खाता पीता नही है।

No comments:

Post a Comment