Saturday, January 21, 2017

रोशन सिंह

"ज़िंदगी जिंदा-दिली को जान, ऐ रोशन
वरना कितने ही यहाँ रोज़ फ़ना होते हैं"
इलाहबाद की नैनी जेल से जब यह शेर बाहर आया तब इसके पीछे पीछे एक जनाज़ा भी बाहर आया।उस जनाज़े को उठाने के लिए जेल के बाहर एक क़तार लगी हुई थी।लोग एक झलक अपने महबूब दोस्त को देखना चाह रहे थे।औरतें,बच्चे आदमी सब इंतज़ार कर रहे थे उस नौजवान को देखने के लिए।
जेल में इस नौजवान ने फाँसी के फंदे को खूबसूरती से चूमा था।अपनी आखरी काल कोठी को सिर्फ इसलिए प्रणाम किया की ईश्वर की दी हुई यह आखरी छत थी।अब वोह सीधे उस ईश्वर से पूछेगा की हमे तो आज़ाद कर दिया मेरी माटी को कब गुलामो से आज़ाद करोगे।शायद ईश्वर उसकी आँखों में आँखे डालकर कह दें,बस अब,आजही।
शाहजहाँपुर के इस नौजवान का नाम रोशन सिंह है।जिन्होंने आज ही जन्म लिया था।जो गाँधी के आह्वाहन पर घर बार छोड़ आंदोलन में कूद गए।भगत सिंह और दूसरे साथियों के सम्पर्क में रहकर आज़ादी के ताने बाने बुने।आखरी में गिरफ्तारी के बाद क्राँति की सबसे खूबसूरत चौखट फाँसी तक पहुँचे।इकलौता ऐसा क्रन्तिकारी जो बेहद धार्मिक होते हुए बेहद मोहब्बत से दूसरे मज़हब की खुशबू बिखेरता रहा।यह नौजवान जेल में गीता का पाठ करते हुए हर एक को मोहब्बत और भाईचारे से जोड़ने का नुस्खा बाटता रहा।
आज आप सबको ठाकुर रोशन सिंह को पढ़ना होगा।यह आज़ादी गाँधी की मज़बूत पकड़ और रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारियों की फाँसी से उपजे बीज का परिणाम है।देखिये इन लोगों ने कैसे समाज को एक एक करके जोड़ा था।यह भी देखिये इनके दिलों में कौन सा धर्म था,जो आपके दिलों से दूर हो रहा है।वोह कौन से लोग थे जो गीता को आत्मसात करके बाइबिल और कुरान वालों को एक कर रहे थे।
अभी कह रहे हैं ढूंढिये,उन किरदारों को पढ़िए,तभी रास्ता दिखेगा वरना भरम में जीये।ठाकुर रोशन सिंह की शहादत पर सर झुक जाता है।आज आपका जन्मदिन है, सलाम की आप थे।आपके होने की वजह से आज हम हैं।कल भी रोशन सिंह रौशनी दिखाएंगे।

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