एक माला ले लो जिसमे सब दाने तुम्हारे अपने हों।वोह जिनके दिमाग में क़ौम का भूत सवार है और वोह जो अपनी पुरातन संस्कृति के नशे में सब कुछ खत्म कर देना चाहते हैं।तुम सब लोग अपने बच्चों के हाथों से विज्ञान की किताबे छीन लो,यह बाहरी लोगों की लिखी हुई हैं, क्या ज़रूरत है इन्हें पढ़ने की।
न्यूटन की जगह नेतराम को पढ़ो और आइंस्टीन की जगह अलाउद्दीन को पढ़ो।तुम दोनों लोग जाओ घरों में,लाइब्रेरियों में या जहाँ तक जा सकते हो अपने खुद के क़ौम और धर्म के सिवा जो लिखा गया है सब खत्म कर दो।उन सामानों में आग लगा दो जो दूसरों ने बनाई और तुम इस्तेमाल करते हो।
वोह दवाएँ, वोह इलाज,वोह चीज़ें जो तुम्हारे अपनों ने नही बनाया उससे आज तत्काल पीछा छुड़ा लो।अच्छा चलो यह नही हो पाएगा तुमसे।इसे करने का जिगरा उथले थिथले लोगों में नही होता है।तो ऐसा करो इतिहास भूगोल अर्थशास्त्र को खत्म कर दो।इनमे भी विदेशियों के बहुत से हिस्से हैं।
मैं तो कहता हूँ सब छोड़ो, चलो खुद लिखो,अपने झुँड के लोगों से कहो की चलो जो बीत गया सो बीत गया।अब हम लिखेंगे सब।उठो और लिख डालो हर वोह विषय जिसपर तुम्हे संशय है।यह यूँ रोज़ एक एक लाइन पर क्या बखिया उधेड़ना।चलो पूरा झुँड लगकर हर उस विषय को लिख डाले जिसे साजिशन किनारे किया गया।पूरी ज़िम्मेदारी से तुम दोनों से कह रहा हूँ की दुनिया के सबसे ज़्यादा सताए तो तुम ही मासूम मिसकीन लोग हो।तो चलो तुम दोनों धर्म और क़ौम के नए नए सिपाहियों लाठी से पहले कलम उठाओ।
किसी को गाली देने,मारने से अच्छा है जो सच है वोह लिख डालो और पढ़ाओ मगर यक़ीन करो उसे पूरा पूरा लिखना,कट और पेस्ट करोगे तो यह बीमारी फिर बनी रहेगी।मुझसे शिकायत करने मत आना इतिहास के पन्नों पर,जब कुछ गलत लिखे तो जाओ और लिखो।वोह लिखा हुआ छपवाओ और पढवाओ।मुझे कोई फ़र्क़ नही पड़ता की तुम अपनी नस्लों को क्या पढ़ाते हो और क्या बनाते हो।यहाँ बहस करने की जगह अपने छोटो को बैठकर शाखाएँ लगाओ या तबलीग करो मगर कुछ करो जिससे भरम खत्म हो।एक न एक दिन हमारे जैसे गलत पढ़ने और पढ़ाने वाले खत्म हो ही जाएँगे तब तक तुम्हारे बीज फसल बन चुकेंगे।जाओ और उनसे अधर्मियों की हर विषय की किताब छीनकर अपनी सुंदर,पवित्र सोच की परिभाषाए पकड़ाओ।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Saturday, January 28, 2017
सब मिटा दो
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hafeezkidwai
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