Tuesday, January 31, 2017

माँ सरस्वती

माँ शारदे,माँ वाग्देवी,माँ भारती, माँ वागीश्वरी।सब नामो से उत्तम और पहचाना हुआ नाम माँ सरस्वती।कला,ज्ञान की देवी।हम सबकी कलम की रूह।लफ्ज़ की रूह।सोचने समझने लिखने पढ़ने सबकी रोशनी हैं माँ सरस्वती।एक तस्वीर जो सफेद सारी और वीणा की दिमाग में इस मासूमियत से बैठी है।वह हमे लिखावट में पाकीज़गी का एहसास कराती है।
कितना दुःख पहुँचता होगा माँ सरस्वती को जब लोग खून खराबे,दिलों को बाँटने,नफरत फैलाने वाले अल्फ़ाज़ लिखते होंगे।जिस लिखे से इंसानियत रो दे सोचिये क्या गुज़रती होगी माँ सरस्वती पर।जब ज्ञान वाले जिस्मो को नोचने और घरो को जलाने की बाते करते होंगे तब ज्ञान की देवी कितना टूट जाती होगी।जब तुम अपनी कलम से किसी के खून की दास्तान लिखते होंगे तब माँ सरस्वती की सफेद सारी पर भी खून की छींटे आती होंगी।वो सौम्य और उज्जवल मुख वाली मेरी माँ तुमको देख कर मायूस हो जाती है।
मैंने देखा है जब तुम कालेज,यूनिवर्सिटी,स्कूल में नफरत के पाठ पढ़ा रहे होते हो तब वो सौम्य चेहरा सफ़ेद बर्फ सा हो जाता है।ज़रा भी इज़्ज़त है माँ सरस्वती की तो आओ आज से अभी से दिल जोड़ने वाला लिखे और पढ़ाए।नफरत की जगह मोहब्बत की बातों को आगे बढ़ाए।तुम देखना मै गवाह हूँ की माँ सरस्वती हमारी मोहब्बत की बातों से एक ऐसी मुस्कान बिखेरेंगी जिससे मानवता खिलखिला उठेगी।
ज्ञान को निर्माण में लगाओ विनाश में नहीं।माँ सरस्वती हम सब को खामोश देख रहीं हैं।बसन्त पंचमी की पीली सुबह अगर माँ सरस्वती की सफ़ेद छाँव में गुज़ारोगे तो सुकून मिलेगा।मोहब्बत से दूसरों को थामोगे तो ख़ुशी होगी।तुम्हारी क़लम,जिसमे माँ सरस्वती खुद उतर आती हैं उससे वोह लिखो जो माँ सरस्वती के दामन की खुशबू हो।वोह अल्फ़ाज़ बुनो जिसमे माँ सरस्वती झलकें।नफ़रत और फूट लिखकर किस माँ के करीब जाओगे।माँ सरस्वती हमारी लिखावट में रहें, इस प्रयत्न में जब लफ़्ज़ फूटेंगे तो उसकी खुशबू ज़माना महसूस करेगा।यही तो बसन्त की छटा है।

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