Thursday, January 26, 2017

किताब

जब तुम किताबों के साथ डेट करना तो उसके गले में हाथ डालना और सुकून से किसी पेड़ की टेक लगाकर उसे सिर्फ देखते रहना।किताब तुम्हे देखकर मुस्कुराएगी।हो सकता है वोह अपने खानदान का ज़िक्र करे,कहे की वोह प्रेमचन्द की लिखी है या ग़ालिब की या मंटो की या कुर्रतुल की या इस्मत की या अमृता की या साहिर की या महादेवी की या राहुल की या मोहन की या भारती की या मिल्टन की या पाउलो की या गोर्की की लिखी है।हो सकता है वोह इन बड़े खानदानों का रौब तुम पर झाड़े तो एक बार उसे बन्द कर देना।
बड़े खानदान की एक कमज़ोरी होती है की पहली बार में वोह फ़ालतू की अकड़ लिए रहता है जैसे ही तुम उस पर से तवज्जो हटाते हो वोह बिलकुल झिझक जाता है।फिर जब तुम उसे दोबारा देखते हो तो वोह अपनी खानदानी मोहब्बत के पुरखुलूस अंदाज़ से तुम्हारे अंदर उतर जाता है।इसलिए जैसे ही तुम उस किताब को दोबारा उठाओगे वोह तुम्हे लपक कर चूम लेगी।
जब तुम पेड़ की आड़ में बैठे किताब के काले बाल पलट रहे होगे तो हो सकता है लोग तुम्हे झाँक झाँक कर देखें।यह तो इंसानी खासियत है जो मेरे पास नही वोह तुम्हारे पास कैसे,इसलिए वोह तुम्हे देखते रहेंगे।तुम जैसे जैसे उस किताब के बालों से खेलते हुए उसकी आँख में उतरने लगोगे।तुम अपने आस पास से अकेले होते चले जाओगे।अब तुम किताब के अंदर उतरने लगे हो ऐसे में बाहर क्या हो रहा किसे पता।जो किताब डेट पर तुम्हारे साथ गई है।वोह अगर तुम्हे शोर से काटकर अपने सुरों में गूँथ ले यक़ीनन वोह रिश्ता आसमानी है।
किताब के वरखों पर जब तुम उंगलिया हौले हौले फेरतो हो तो किताब को हम सिमटते हुए देखते हैं।जब तुम उसके हर्फ़ को आँखों में बसा लेते हो तो उसका सुरूर तुम्हारे चेहरे पर साफ़ दिखता है।जब डेट पर तुम्हारे बीच के पन्नों पर सर रखकर मैं लेटा होता हूँ तो माँ की एक बात बहुत याद आती है"किताबे इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं"। तब माँ ने दोस्त कहा था आज इस उम्र में वोह दोस्त मोहब्बत में बदल गयी।"किताब इंसान की सबसे खूबसूरत मोहब्बत है।"

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