हाहाहाहा कैसी बचकानी हरकते हैं तुम्हारी।तुम आज मुझे गन्दी और नापाक कह रहे हो।तुम मुझे छूने से भी बच रहे हो।डर रहे होगे कहीं बीमार ना पड़ जाओ।तुम्हे पता हैं तुम्हारे दादा नहीं नहीं परदादा या उनके भी दादा मेरी कितनी इज़्ज़त करते थे।जब भी मेरे पास आते तो मै भी पूरे ख़ुलूस से उन्हें समेट लेती थीं।इस मोहब्बत से उन्हें चाहती थी की उनके अंदर बाहर दोनों की गन्दगी मुझमे घुल जाती और वो निकलते तो पाक और शफ्फाक।मैं सदियों से तुम्हारी खिदमत करती आ रही हूँ।आज़ाद बेलौस मोहब्बत के साथ और तुम आज मुझे छूने से भी घबराते हो।हैरत है।मालूम है मुझमें वो पहले सी ताज़गी नहीं मगर ये तो मेरे बस में नहीं था।तुम्हे पता है तुम मुझसे दूर क्या हुए मुझे लोगो ने ऐसे जकड़ दिया जैसे मैं आवारा थी।मुझे संगेमरमर में चुनवाने की साजिशे चल रही हैं और तुम मदमस्त बेफिक्र मेरे ही सामने बैठे चाय पि रहे हो।अपने पुरखो की लाज रख लो मुझे ऐसे तो न चुनवाओ।जब तुम गंदे से आते थे तो मै तुम्हे नहलाती थी।आज मैं गन्दी हूँ तो तुम मुह मोड़ रहे हो।तुम्हारे मैलेपन में मेरी गलती नाथी लेकिन मेरे मैलेपन में तुम्हारा ही हाथ है।मुझे पता है मैं ही चुनवाई जाउंगी क्योंकि मै एक औरत हूँ और तुम आदमी बनकर मुस्कुराना।ठहाके मरकर चाय से खेलना।तब भूल जाना अपनी गोमती को।गोमती नदी को।गोमा मैया को।यूँ ही किनारे बैठे मुझे कंक्रीट में सिसकने देना।जाओ ऐ बेवफा।।।।।।।।।मैं एक टक आंसुओ के साथ गोमती नदी को देखता रहा और वो यूँ ही शिकायत करती रही।।अंतराष्ट्रीय नदी दिवस पर मैं गोमती के पाँव पकड़ कर दिनभर रोना चाहता हूँ,चाहता हूँ की मेरे आँसू तुम्हे खट्टा कर दें गोमा।।हम,गोमती और चाय।।।तीनो बेवफा।।।।जाने कब धोखा देंगे एक दूसरे को।।
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