Monday, April 10, 2017

अली बजरंगबली

अगर पढ़ना है तो पूरा पढ़ें, वरना असली मज़ा छुट जाएगा।जितना चाहे बाँट लो,आजका दिन बांटकर दिखा दो तो जाने।आज शरबत की मिठास से शकर और पानी अलग करके दिखा तो जाने।तुम जितना बांटोगे कुदरत उतना एक करने को मचल जाएगी।आजका दिन उन दो ताक़तों का गवाह है जो भूगोल में भले अलग रहे मगर एक एक बड़े तबक़े को अपने किरदार से छू लिया।

जिनके दिल में मोहब्बत और रहम,रूह में ख़िदमत,जिस्म में अथाह ताकत यही तो हैं हनुमान।एक ऐसा किरदार जो सिर्फ और सिर्फ ख़िदमत से इतना ऊँचा मकाम पाए।अगर दिल में हल्की भी मोहब्बत है तो वह हनुमान हैं।किसी आँसू के लिये तड़पन है तो वह हनुमान हैं।किसी बीमार के लिए आपके कदम उठे तो उन कदमो में हनुमान हैं।औरत की अस्मत की हिफाज़त के लिए अगर आप बढ़े हैं तो उसमे हनुमान हैं।

बिना फ़र्क,बिना बटे अगर किसी बुज़ुर्ग के लिए हाथ दिया है तो वह हैं हनुमान।राम जिन्हें अच्छे से पता था की हनुमान के रहते मृत्यू उनके पास भी नही आ सकती,तो हनुमान को हटाने के लिए सर्पलोक तक भेज दिया,यह थे हनुमान।वफ़ादारी और ईमानदारी की तारीख़ी मिसाल हैं हनुमान।मैं जनता हूँ मज़हब,पार्टी,सोच,फिरके हनुमान की खूबियां जानने में आपके पाँव बांधेंगे,मगर आपको अपना किरदार दुरुस्त करने के लिए हनुमान को समझना होगा।उनकी ताकत और धैर्य के सन्तुलन को समझना होगा।साहस और शाँति के खमीर को देखना होगा।तमाम नफ़रत को ताख पर रख कर अगर इस किरदार से मोहब्बत सीख सको तो सीख लो।

कुछ लोग मेरे हनुमान को लड्डू,सिन्दूर, घंटी,मन्दिर में तलाशेंगे मगर अपने दिल में हर एक से बिना फ़र्क के मोहब्बत करके मेरे हनुमान के लिए अपने दिल में घर नही बनाएंगे।ज़रा भी,रत्ती भर भी भक्ति या प्रेम हो हनुमान से तो दोस्त हनुमान की तरह दिल खोलकर दिखा दो की यहाँ भी राम सीता की शक्ल में मोहब्बत है, दर्द का एहसास है, तकलीफ़ का इलाज है।मैं अपने हनुमान के किरदार में खो जाना चाहता हूँ।ज़िन्दगी को मोहब्बत और ख़िदमत के लिये ज़र्फ़ कर देना चाहता हूँ।यकीन है हनुमान हमे भी और आपको भी रास्ता दिखाएंगे।आज उनकी जयंती पर जयकारे से ज़्यादा ख़िदमत कीजिये,यही मेरे हनुमान का रास्ता है और यही आपको हनुमान तक ले जा सकेगा।

और दूसरी तरफ हैं वोह जिनके होने पर ज़माना गुरूर करे।उनकी नरमी ऐसी की मोम भी उनसे सीखे।ताक़त इतनी की उस दौर में सबसे ज़्यादा।मोहब्बत इतनी की खुशबू अब तक है।इल्म इतना की इल्म का बादशाह।ख़िदमत ऐसी की मिसाल।या यूँ कहे हर फ़न में तारीख़ गढ़ने वाली मिसाल।यही तो हैं हज़रत अली।अथाह ताक़त के बावजूद दिल में अथाह नरमी।मेरा दिल जब डूबने को होता है तब उसे सहारा देते हैं अली।उनका किरदार बोलता है।आवाम के लिए उनके जिस्म का हिस्सा हिस्सा लगा था।

अली ने सूफ़िज़्म की वह नीव रखी जिसकी आगोश में सारा जहाँ आ गया।जब उन्होंने मोहब्बत से बाहे फैलाई पूरी आवाम सर झुका के खड़ी हो गई।हर एक के सवाल,परेशानी,दर्द,तकलीफ़ में जिसने फाहे का काम किया वह अली थे।जब आँखों में अँधेरा और मुस्तकबिल में कालिख़ दिखी तब रौशनी का काम किया अली ने।मेरे अली ने हर दर्द में चीरा लगाया।हर तकलीफ़ में मरहम लगाया।इंसानियत को अपनी मोहब्बत और दूर की सोच से ऐसा रास्ता दिखाया की राह आसान हो गई।उनके सामने ज्ञान,कला,विज्ञान,धर्म,दृष्टि,विचार ने ऐसी तरक्की की की उसका असर आज तक है।

अगर ज़रा भी दिल में काम की,इल्म की,मोहब्बत की,ख़िदमत की गुंजाईश हो तो हज़रत अली को पढ़िए।जिन्होंने हज़ारों साल पहले वह कह दिया जिसकी आज भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी तब थी।मुल्क,मज़हब,सोच,पार्टी का बन्धन खोलकर जब उन्हें पढ़ेंगे तब अली की दिखाई राह के मज़े ले पाएँगे जैसी सूफी आजतक लेते आए हैं।आज उनके पैदाइश मनाने से ज़्यादा उन्हें ज़िन्दगी में उतारने का वक़्त है।अली कल,आज और कल ज़रूरी रहेंगे क्योकि वह रौशनी हैं।इल्म की रौशनी।

आजका दिन मेरे दिल में एक खूबसूरत एहसास लिए हुए है।आज अलीगंज के हनुमान मन्दिर पर लगा अली की याद में चाँद सितारा और जेठ के मंगल में सआदत खान की माँ का अली की नज़्र में शरबत बाँटना सब गूँथ सा गया है।यही हम हैं।यही या अली,बजरंगबली हैं।यही भारत है।

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