Thursday, April 27, 2017

फेबियन

हैनिबॉल लड़ने में ज़बरदस्त माहिर था।रोम उसके सामने असहाय था।पन्द्रह बीस सालों तक वोह रोम की सेना में किसी बद्तर ख्वाब की तरह आता था।उससे सीधे लड़ना मौत को दावत देना था।तब रोम में एक सेनापति हुआ फेबियस।वोह लगातार लड़ता रहा हैनिबॉल से,इनके बीच कभी सीधी लड़ाई नही हुई।रोज़ रोज़ थोड़ी बहुत लड़ाई करीब दस साल चली।इन सालों में लड़ते लड़ते रोम की चमकदार संस्क्रति हैनिबॉल की सीमा में जाने लगी।लम्बे वर्षों के संघर्ष के बाद फेबियस ने जीत हासिल की और ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर रोम का एकछत्र राज शुरू हुआ।

अब यह क़िस्सा इसलिए क्योंकि युद्ध की नीति के लिए अंग्रेजी में एक शब्द है "फेबियन"।फेबियन का अर्थ होता है ऐसी लड़ाई जिसे दो टूक फैसले तक न पहुँचने दिया जाए।यानि हल्का हल्का लड़ना धैर्य के साथ।यह नीति जितने बड़े शासन हुए हैं सबने अपनाई है।लड़ाई का उद्देश्य केवल रोके रखना,यह इस क़दर कारगर रही है की जहाँ प्रयोग की गई वहाँ उस पूरे भूभाग को अपने में मिला लेकर सम्राज्य बन गया।

फेबियस कहता था की बहुत बार मज़बूत दुश्मन से सीधे लड़ना बेवकूफी होती है।अगर हम हारेंगे भी तो धीरे धीरे,यानि हमारा शासन एकदम से नही जाएगा।खैर वोह धैर्य वाले लोग थे,तभी इतना लम्बा शासन कर पाए।अब तो जल्दबाज़ लोग हैं।एकदम से सब जीतकर सब हार जाना चाहते हैं।
राजनीती में भी फेबियन मन्त्र ही सबसे कारगर है अगर आप एकदम से सत्ता में आ गए और अक़्ल से काम नही लिया तो एकदम से चले भी जाएँगे।

वैसे हैनिबॉल जैसा क्रूर सेनापति तक हार गया तो बाकि क्या चीज़ हैं।मुझे तो लगता है फेबियन नियम घर में भी खूब फॉलो होता है।एक पत्नी धीरे धीरे पति से लड़ती है और प्रेम करती है, उसे लड़ाई और प्रेम में उलझाए रखती है फिर एक दिन विजय प्राप्त करती है।वैसे भी जो नियम किसी व्यक्ति के नाम से जुड़ जाए वोह असाधरण होता है।कारगर होता है।जल्दबाज़ लोग इसमें मीन मेख निकालें बाकि फेबियस के फेबियन को समझें।बहुत से रास्ते इसी में क़ैद हैं।जीतने के लिए पहले लड़ना सीखो।

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