Saturday, April 1, 2017

सेब से सीखो

सेब में एक दाग था।मैं उसे फेकनें ही जा रहा था की माँ ने रोका और कहा फेको मत,फिर चाकू से काटकर वोह दाग हटा दिया और कहा बेफिक्र होकर खाओ।उसके बाद सिखाया यूँ मामूली सी कमियों से पूरी बेहतरीन चीज़ फेका नही करते।कमियो को हटा दो तो वह वैसे ही उम्दा लगेगा जैसा तुम चाहते हो।

हमने भी सीखा यूँ मामूली नाइत्तेफाकी से किसी को पूरा मत खारिज करो।आजकल तो पूरा सेब फेक देने का फैशन है और डाक्टर भी कहते है दाग लगे मत खाओ।तो ऐसी पीढ़ी तो हरचीज़ को एकदम से खारिज करना ही सीखेंगी।तभी तो बड़े बड़े लेखक,नेता,विचार सब दो कौड़ी  के कहे जाने लगे।जिन लोगो को इतिहास में रट रट के भी कुछ ही प्रतिशत नम्बर मिले हों वह इतिहासकारो को आइना दिखा रहे है।

हैरत है हम सीखना नहो चाहते और न ही बर्दाश्त करना।हमे अपने से अलग सोच,शक्ल के लोग बर्दाश्त नही होते।एक गुस्सा है की अपने से इतर सबको खत्म कर डालना है।डस्टबिन में डाल देना है।हम तब यह भूल जाते हैं की दूसरा भी ऐसे ही सोच हमे खत्म कर सकता है।ऐसे तो तबाही रुकने की जगह बढ़ेगी।खैर खुशी है माँ ने सेब के सहारे ज़िन्दगी का वह फ़लसफ़ा समझा दिया जो किताबो में भी ना मिलता।दोस्त दूसरो की इज़्ज़त करो दुनिया तुम्हारी करेगी और ज़मीन पर कौन है जो इज़्ज़त का ख़्वाहिशमन्द ना हो।यह लफ़्ज़ पुराने हैं, पहले भी लिख चुके हैं मगर हमे लगता है यह हमारी रोज़ की ज़रूरत हैं

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