हमारे बूढ़े किस क़दर चालाक थे,उन्हें पता था की हम किताबों का रुख नही करेंगे।हम किसी के पास कुछ सीखने भी नही जाएँगे।तो उन्होंने अपने बीच से क़ाबिल लोगों से जुड़े दिनों को त्योहारों में डाल दिया की कम से कम इसी बहाने इनका नाम तो चलता रहेगा।जब किसी को लगेगा तो इन नाम के बहाने ही सही उस किरदार को ढूंढकर पढ़ेगा और अपनी ज़िन्दगी के साथ दुनिया को बेहतर रास्ता दिखाएगा।मगर नही,हम ज़्यादा क़ाबिल थे,हमने यह चेन तोड़ दी।कहते हैं सोच में फ़र्क होने से हम अच्छे से अच्छे इंसान को ठुकरा देते हैं।अपनी रवायतों को तोड़ देते हैं।
यही हुआ मशहूर वैज्ञानिक,दार्शनिक,चिंतक और ईमाम हज़रत जाफर सादिक के साथ।बहुत से मुसलमानो ने उनको याद करने में अपनी ज़हनी कमज़ोरी को ज़्यादा तवज्जो दी।आज लोग इमाम जाफर की याद में कूँडे मनाएंगे और बहुत से लोग इसकी मुखालफत करेंगे।मगर मुखालफत में यह मत भूलें की वह क्या थे।
इमाम जाफर अल सादिक हज़रत अली की चौथी पीढी में थे।उनके वालिद इमाम मोहम्मद बाक़र खुद वैज्ञानिक थे और मदीने में अपना कॉलेज चलाते हुए सैंकडों बच्चों को पढ़ाते थे।अपने पिता के बाद जाफर अल सादिक ने यह काम संभाला और अपने शागिर्दों को कुछ ऐसी बातें बताईं जो इससे पहले किसी ने नही बताई।
उन्होंने अरस्तू की चार मूल तत्वों की थ्योरी से इनकार किया और कहा कि मुझे हैरत है कि अरस्तू ने कहा कि दुनिया में केवल चार तत्व हैं, मिटटी, पानी, आग और हवा।मिटटी खुद तत्व नहीं है बल्कि इसमें बहुत सारे तत्व हैं।इसी तरह जाफर अल सादिक ने पानी, आग और हवा को भी तत्व नहीं माना।हवा को भी तत्वों का मिश्रण माना और बताया कि इनमें से हर तत्व सांस के लिए ज़रूरी है। मेडिकल साइंस में इमाम सादिक ने बताया कि मिटटी में पाए जाने वाले सभी तत्व मानव शरीर में भी होते हैं। इनमें चार तत्व अधिक मात्रा में, आठ कम मात्रा में और आठ अन्य सूक्ष्म मात्रा में होते हैं।
उन्होंने बताया, "जो पत्थर तुम सामने गतिहीन देख रहे हो, उसके अन्दर बहुत तेज़ गतियाँ हो रही हैं। उसके बाद कहा, "यह पत्थर बहुत पहले द्रव अवस्था में था।आज भी अगर इस पत्थर को बहुत अधिक गर्म किया जाए तो यह द्रव अवस्था में आ जायेगा।
ऑप्टिक्स का बुनियादी सिद्धांत 'प्रकाश जब किसी वस्तु से परिवर्तित होकर आँख तक पहुँचता है तो वह वस्तु दिखाई देती है।साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ब्रह्माण्ड में कुछ भी स्थिर नहीं है। सब कुछ गतिमान है।
ब्रह्माण्ड के बारे में एक रोचक थ्योरी उन्होंने बताई कि ब्रह्माण्ड हमेशा एक जैसी अवस्था में नहीं होता। एक समयांतराल में यह फैलता है और दूसरे समयांतराल में यह सिकुड़ता है।
उनके मशहूर शागिर्दों में जाबिर इब्ने हय्यान , इमाम अबू हनीफ, मालिक इब्न अनस थे।
अब ज़रा से भी महसूस कर सकें तो उन्हें महसूस कर लें।जिन रवायतो को आप मज़ाक बताते हैं उन्हीं ने आज उनको ज़िंदा रखा है वरना ढूंढते रहते अरबी फ़ारसी की किताबों में।कई बार रवायतें इसी लिये डाली जाती हैं की शख्सियतें और उनके काम पीढ़ी दर पीढ़ी नीचे पहुँच जाए।यह तरीके वोह नही समझेंगे जो एक झटके में सब खत्म कर देना चाहते हैं।तुम सब कीचड़ उछालना एक दूसरे पर मगर ज़रा उन घरों को देखना की तुमसे वोह लोग बेहतर हैं जो अपने हीरों को किसी भी बहाने,किसी भी तरह याद तो रखते हैं।
मैं हर धर्म के लोगों से कहता हूँ की अपने बीच से अच्छे लोगों के किस्से आम करो।हमे इमाम जाफ़र रास्ता दिखाएंगे नाकी कोई अल्लम् गल्लम् मौलाना।फिर कह रहे हैं अपने पीछे पलट कर देखो तो आजकी जहालत से पीछा छुट जाए।किसी मुद्दों पर कव्वों की तरह कांव कांव से बेहतर है विज्ञान को देखो,गणित को समझो और दुनिया की ज़िन्दगी आसान करो।आज कूँडे भरते देख मज़ाक उड़ाते वक़्त अपने गिरेहबान में झाँकना की तुम्हारे आँगन में क्या किसी सलीकेमन्द, क़ाबिल,वैज्ञानिक को ऐसे याद किया जाता है।वोह जाहिल हैं मगर अपने से क़ाबिल की इज़्ज़त करना जानते हैं।रसमन ही सही इमाम सादिक़ जाफ़र उनके घरों में साँस तो ले रहें हैं।तुम कुछ मत करो उनपर खुले सेमिनार करो,उनकी खोज पर बात करो,उनके लिखे को पढ़ो,तब आने वाली नस्लें सर उठा पाएँगी और तुम दुनिया को कुछ दे पाओगे वरना ऐसे ही ज़िन्दगी को अनाप शनाप कामों में तबाह करते रहो।
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