उसे क्लॉस में बैठने नही दिया गया।जब जगह मिली तो सबसे पीछे।उसे पानी का घड़ा छूने और पानी पीने से रोका गया।जितना रोकते आए थे उसके कुटुम्ब को उससे ज़्यादा रोका गया मगर वह नही रुका।भीमराव सकपाल लड़ता रहा।
एक ब्राह्मण शिक्षक जिसने भीमराव को हमेशा सराहा उनके कहने पर सकपाल हटा अम्बेडकर लगा लिया।इस तरह दुनिया का वह ताकतवर नाम भीमराव अम्बेडकर सामने आया।फिर किताबों से ऐसी दोस्ती की की भारत का पहला कानून मंत्री बना।
अम्बेडकर को जिससे रोक गया उसे उन्होंने हासिल करके दिखा दिया।एक ऐसा इंसान जिसकी सोच सैकड़ों साल आगे की थी उन्होंने उन शोषितों को ऐसा थामा की वह आज भी उनके दिलों में ज़िंदा है।जिन्हें भगवान के मन्दिर में जाने से रोका वह खुद भगवान बन गए। जिन्हें विचारों से रोका वह खुद विचारक हो गए।जिनहे धर्म के विधान से रोका उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र का संविधान लिख डाला।
वह अमिट, जूझने और जीतने वाले महा पुरुष थे।जैसे गाँधी अपने विरोधियों की मजबूरी हैं ,वैसे ही अम्बेडकर भी अपने विरोधियों की मजबूरी हैं।
उन्हें आप नज़रअंदाज़ कर ही नही सकते।उनको पीछे छोड़ आप खुद अलग थलग पड़ जाएँगे।जिसे भी अपने देश,धर्म,जाति, संगठन को आगे लाना है उसे अम्बेडकर बनना चाहिए।महसूस करिये उनके संघर्स को और अपने संघर्ष का रास्ता बनाइये।अम्बेडकर उस रास्ते की मशाल हैं।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, April 13, 2017
अम्बेडकर
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hafeezkidwai
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