Sunday, April 9, 2017

यह वक़्त सोचने का है

देखो अगर ज़माने की नब्ज़ पकड़ सकते हो तो पकड़ो। अब वोह वक़्त नही रहा की कुछ भी बोलकर निकल जाओगे। अब आलोचना एक दुश्मनी सी नज़र आती है। मैं कह सकता हूँ की अपने अंदर वक़्त के साथ का बदलाव लाओ, वरना खत्म हो जाओगे। सबसे पहले जैसे।हो वैसे दिखो। अगर निजी ज़िन्दगी में बर्दाश्त करने क्षमता कम हो तो सोशल मीडिया पर भी दोमुंहापन मत करो। जो तुम्हारे विचारों सा नही उसे छोड़ आगे बढ़ो।

सबसे पहले तो ज़बरदस्ती के डेमोक्रेटिक मत बनो। जो सही नही है उसे सही मत करो बल्कि सही जगह पहुँचा दो।कम से कम अक़्ल वाला भी अब तक समझ चुका होगा की सोशल मीडिया विमर्श का माध्यम नही ही रहा।गलियों के लफंगों की तरह कोई भी कभी भी बिना देखे गालियों की बौछार कर देता है।अगर तुम अच्छा लिखने वाले हो तो इनको सबसे पहले ब्लॉक करो।यही नही बल्कि कभी कोई किसी के पोस्ट पर गाली बक रहा हो उसे वहीं ब्लॉक कर दो,अपनी वाल को अपने घर की वाल समझो,गन्दगी से दूर रखो।

यहाँ ज़्यादा डेमोक्रेटिक बनने की ज़रूरत नही है।जो गालियाँ लिख रहे हैं उन्हें अच्छा कुछ पढ़ने भी नही देना चाहिए।उनकी किस्मत में वही गलाज़त ठीक है।
मेरे किसी पोस्ट पर भले एक व्यक्ति आए या हो सकता वोह भी न आए मगर मैं ज़हनी गन्दे,ज़बान के घिनौने लोगों को अपने नज़दीक़ नही आने दूँगा। मुझे न ज़माने को सुधारना है और न रोकना। जो अपने माँ बाप की परवरिश का जैसा चाहे प्रदर्शन करे,हम नही रोक सकते।उनके माँ बाप ने जो सिखाया है उसे वोह आगे बढ़ा रहें हैं या हो सकता है अपने माँ बाप के बताए मार्ग की अवहेलना करके आगे बढ़ रहें हैं, ऐसी दोनों ही सूरतो में हमे इनसे कोई सरोकार नही है।

जिन्हें गन्दगी में लोटने में मज़ा आता हो उन्हें हम कुछ नही कह सकते मगर जिन्हें यह बुरा लगता हो वोह फौरन ढूंढ ढूंढ कर इन्हें ब्लॉक करें।अपनी छोटी सी वाल को  स्वच्छ रखिये।
अब कुछ लोग विमर्श का नाम लेकर हाय तौबा मचा सकते हैं मगर एक बार दिल पर हाथ रखकर कहें की आखरी बार कब विमर्श किया था।अगर आप साहित्य के शौक़ीन हैं तो वैसे ही मित्र रखिये और वही विमर्श का विषय,वैसे अब हर चीज़ में राजनीती घुस चुकी है इसलिए वोह भी ज़्यादा दिन अछूता नही रहेगा।मैं यहाँ विरोधी या आलोचक को ब्लॉक करने को नही कह रहा हूँ।मेरा यह स्पष्ट मत सिर्फ उनके खिलाफ है जो गाली गलौज करते हैं फिर चाहे वोह आपके मित्र हों या दुश्मन। उनको ब्लॉक कीजिये जो मौत पर ठहाके लगाते हैं।उन्हें दूर कर दीजिये जो धर्म की आड़ में गोरखधंधा चला रहें हों।उन्हें भी अपने इर्द गिर्द फटकने मत दीजिये जो हिँसा में किसी भी हद तक समर्थन करते हों।अब मासूमियत से यह मत कह दीजियेगा की इन्हें कैसे पहचाने।

मैं नही कहता मैं सही हूँ मगर मुझे इतना पता है की मैं अपने दुश्मन को और ज़्यादा गलती करने से बचा लूँगा।उसे और अधिक पाप करने से रोक लूँगा।कहा जाता है की किसी को इतना मत भड़काओ की वोह पाप कर बैठे।जो तुम्हे देखकर तुम्हारे आराध्य को गाली दे,उससे वही वक़्त हट जाओ,इससे वोह पाप का भागी और ज़्यादा नही बनेगा।यह सब ख़ामोशी से करो,बड़ा तमाशा करके किसी को ब्लॉक मत करो।सच बताएँ अब किसी के पास इतना वक़्त नही की वोह घन्टो बहस के बाद किसी को सुधार सके।यह भी हो सकता है की हमेशा तुम खुद भी सही न रहो।इसलिए ऐसी चीजों से बचो और आगे बढ़ो।

यह तो जानते ही हो की अच्छी से अच्छी मिठाई मक्खियों के बैठने से और कीड़े पड़ने से अपनी अहमियत,ज़ायका सब खो देती है।इसलिए उसकी खूबसूरती बरकरार रखनी है तो इनसे दूर हो जाओ।हाँ कीचड़ में बहुत लोगों को मज़ा आता है, यह उनका शौक है, हमारा नही।हम हर उस शख्स की पहुँच से दूर हैं जिनका दिमाग और ज़बान गन्दा है।मुझे मक्खियों के उड़ जाने का ज़रा भी ग़म नही होगा।हो सके तो आप भी दूसरो को और गन्दगी फैलाने की इजाज़त न देकर कमसेकम अपनी वाल की खूबसूरती बरकार रखिये।रही बात डेमोक्रेटिक तरीकों या क्रिटिसिज्म की तो वोह हमारी ज़िन्दगी के हर हिस्से से ग़ायब हो चुकी है तो यहाँ हम कर भी क्या सकते हैं।गाली बकती, शोर मचाती,हर हिँसा को सपोर्ट करती एक पूरी जेनरेशन को देखना अद्भुत है।न हम इनमे से हैं और न यह हममे से हैं, इसलिए इनसे दूरी भली।

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