Friday, April 14, 2017

एकजुट हो

एक नही कई कुलभूषण फाँसी पर लटका दिए जाएँगे मगर तुम रोक नही पाओगे क्योंकि तुम अपने अंदर से इतने बंटे, बिखरे हुए हो की एक मज़बूत आवाज़ भी नही बन सकते।कुलभूषण के लिए यह जितने आँसू बहा रहें हैं ज़रा देखिये गौर से इनमे कुलभूषण को बचाने की माँग है या अपने विरोधियों को कोसना।कोई लेखकों को कोस रहा है तो एक्टिविस्ट को,इससे तो यही लगता है की तुम कुलभूषण को बचाना कम बल्कि अपनी बन्दूक रखने का कन्धा बनाना चाहते हो।मुझे तरस आता है उन मौकापरस्त सोच को देख जो लड़ने की जगह कोसने को हथियार बना बैठती हैं।आप दिग्गजों की ट्वीट उठाकर देखिये उसमे कुलभूषण को बचाने की जगह व्यक्तिगत खुन्नस ज़्यादा दिखती है।

मैं नही चाहता था की लिखूँ क्योंकि मैं पाकिस्तान दूतावास और भारतीय गृहमंत्रालय,PMO हज़ारों पोस्टकार्ड भेजने की जुगत में हूँ जिसमे कुलभूषण के लिए अपील हो।सैकड़ो भेजे भी हैं।हम चाहते हैं आप सड़क पर उतरिये मगर उतरेंगे कैसे,पहले अपने दुश्मनो के कॉलर तो नोच लें।
इतना समझ लीजिये जो दर्द में होता है वोह दर्द का इलाज ढूंढता है और जो दर्द का बहाना बनाता है वोह उसके सहारे दूसरो को कोसता फिरता है।

हमे अपनी संसद पर फ़ख्र है की कमसे कम वोह एक होकर एक ड्राफ्ट तो बना रहें हैं।सुषमा जी ने सारी राजनैतिक प्रतिद्वन्दिता भुलाकर शशि थरूर से इसपर ड्राफ्ट बनाने में मदद माँगी और वोह फौरन तैयार हो गए।यह होता है दर्द और दर्द से निकलने का रास्ता।
मैं उन्हें इस मुल्क़ का हमदर्द कभी नही मानूंगा जो इतनी तक़लीफ़ के मौके पर भी अपनी खुन्नस को तरजीह दे रहे हैं।अरे तुम्हारे ट्वीट्स,तुम्हारे पोस्टों, तुम्हारे बयानों से ज़ाहिर होना चाहिए था की हम भारतीय एक हैं।कुलभूषण हमारे घरों का रक्त हैं।हम एक होकर मुकाबला करेंगे।तुम अपील करते की सब अपने अपने दिलों का मैल मिटा इसपर एक हो जाओ।पाकिस्तान की घटिया मानसिकता से लड़ने के लिए हमे एक होना था मगर नही इससे ज़्यादा तो हमे अपने व्यक्तिगत दुश्मनो से लड़ना है, फिर कहते हैं हम भारतीय हैं।

इस वक़्त यह समझ लो जो देश के नागरिकों को एक करने न खड़ा हो वोह है असली दुश्मन देश का।जो दर्द भरे लम्हों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करे वोह है दुश्मन देश का।।।अगर दर्द और तक़लीफ़ इतनी ही है तो उठोऔर पोस्टकार्ड से पाट दो एम्बेसी और मंत्रालय।अपनी सरकार के विरुद्ध लड़ने की जगह या अपने नागरिकों को कोसने की जगह एक होकर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन ऑफिस के सामने मौन जुलूस निकालो।काले फीते बांध हफ्तेभर स्कूल, ऑफिस जाओ।लेकिन यह सब तब होगा जब तुम एक होगे।जिन्हें तुम कोस रहे हो वोह तो हमेशा निकले मगर तब तुमने उन्हें गालियों का अम्बार दिया।कालिख़ पोती अब वोह किसके लिए निकले।

मैं फिर कह रहा हूँ की अपने हक़,अपनी बात के लिए लड़ने के लिए सबसे पहले एक हो।यह एक तब होगे जब आपस में व्यंग्य बोलना, कपड़े नोचना,नीचा दिखाना,ज़हर उगलना बन्द करोगे।मोहब्बत से एक होने की अपील करो और अपने हर मुद्दे को मिलकर एकजुट होकर जीतो।

मैं कुलभूषण के लिए बेहद फिक्रमन्द था।इतनी तकलीफ में था की उस दर्द को लिख नही सका तो अपने स्तर पर कोशिश शुरू कर दी।आपसे कहने की जगह अपने साथियों के साथ अपीलें जारी करने लगा।पोस्टकार्ड भेजे और भेजने में लगा हुआ हूँ।जितनी ताक़त है उतना विरोध कर पा रहा हूँ।मेंरे लिए कुलभूषण जाधव मेरे अपने हैं।अपने को बचाने में लगा जाता है नाकी इस्तेमाल किया जाता है।आपसे हो सके तो हर स्तर पर अपील कीजिये।अपनी संसद से सीख एक होकर लड़िये।काले फीते बांधिए।ऑफिस स्कूल में एक दूसरे को नीचा दिखाने की जगह साथ लाने की कोशिश कीजिये।मेरा अटल विश्वास है की हम कुलभूषण जाधव को अपने भारत की सरज़मीन पर मुस्कुराते हुए ज़रूर देखेंगे।

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