Thursday, April 20, 2017

इंसानों को सम्भाल लो

बहुत ज़बरदस्त आग लगी।पूरा घर बड़ी बड़ी लपटों में घिरा गया।आग की प्रचण्डता विकराल रूप धर कर सब कुछ जला देना चाहती है।घर के अंदर कुछ इंसानों के चीखने की आवाज़ आने लगीं।लगा की कुछ जिंदगियां दहशत में चीख़ रहीं उन्हें बचाया जा सकता है।अंदर से कुछ बच्चों के चीखने की आवाज़ें आसपास के शोर को रुलाने लगीं।कुछ नौजवान आग की परवाह किये बिना घर के तरफ बढ़े।वोह अपनी जान की क़ीमत पर उन ज़िंदगियों को बचा लेना चाहते है।

तभी एक बूढ़े ने उन्हें रोक लिया।क्या करने जा रहे हो,नौजवानों ने कहा यहाँ फंसे इंसानों को बचाने।तब बूढ़े ने घूर कर देखा और कहा,मूर्खों यह वक़्त घर बचाने का है।यह दीवारों पर पानी डालो।घर में रखा सामान जल रहा है उसे बचाओ।अंदर काँच की प्लेटें आग से चटख रहीं हैं उन्हें बचाओ।यह दो चार लोगों के चक्कर में वक़्त मत बर्बाद करो।जाओ जल्दी से घर की आग पर काबू पाओ।तभी एक नौजवान उस बूढ़े पर चढ़ उठा और सुर्ख़ आँखों से गुस्से में चीखा की इस वक़्त अंदर फंसी औरतो की ज़िन्दगी अहम् है या यह दीवारें।बच्चों को बचाना ज़रूरी है या क्रॉकरी।

तुम सठिया चुके हो कहता हुआ वोह नौजवान आग में कूद गया।धीरे धीरे सब लोग बचा लिए गए और बाद में काफी नुकसान के बाद घर में दीवारों के सिवा कुछ नही बचा जलाने को,तब आग भी शांत हो गई।
जब वोह लोग बूढ़े के सामने से गुज़रे और उसे तुच्छ नज़र से देखा तो बूढ़ा उनपर चीखा की तुम सब झूठे हो,मक्कार हो,फरेबी हो।तुम जो दिखते हो,वोह हो नही।तब उनमे से एक बूढ़े से बोला की हमने तो ज़िन्दगी बचाई,तो इसमें फ़रेब क्या है, मक्कारी क्या है।तब बूढ़ा बोला और जब बात देश की आती है तब।

तब तुम दीवारें बचाते हो ज़िंदगियों को खत्म करके।तब तुम भूगोल के चक्कर में मानवता को जल जाने देते हो।जब देश में नफ़रत की लपटे होती हैं तब तुम इंसानों की फ़िक्र करते हो भला,इसी लिए तुम मक्कार हो।उस दिन तुम्हे उन बच्चों को भुन जाने देना था,तुम्हे दीवारें बचानी चाहिए थीं।तुम इन दीवारों में बैठकर कविता लिखते।उसकी दीवारों में चिपकी बच्चों की खालें तुम्हे शब्द परोसती।तुम उसमे बिखरी हड्डियों में सुर,लय ताल ढूंढते मगर नही उस वक़्त तुम्हारे ह्रदय में छणभर के लिए ईश्वर आया और तुम्हे इंसान बना गया।

यह समझ लो इंसान हैं तो ज़मीन है।अगर इंसान नही तो ज़मीन का आचार डालो।मंगल गृह तक हो आओ अगर इंसान न मिले तो वहाँ रहते घबराओगे।जिस तरह घर में जल रहे बच्चों की चीखें सुनी थी,क्योंकि उस वक़्त तुम किसी और की नही सुन रहे थे,अपने दिल की आहट के पीछे चले गए।उसी तरह यहाँ मौजूद हर तक़लीफ़ को सुनो।ज़मीन से पहले इंसान को बचाने दौड़ना वरना बेटा बहुत बूढ़े मिलेंगे जो तुमसे सिर्फ दीवार बचवाएंगे।

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