अगर तुम दिमाग के कमज़ोर होगे या मूर्ख होगे तो हमारी चिंता को सरकार की आलोचना से जोड़ोगे।क्योंकि मेरे लिए कोई भी सरकार,कोई भी शासन जो हमारी मिटटी के लिए दुविधा पैदा करे,उसकी कोई अहमियत नही।मैं चीन को लेकर बड़ा परेशान हूँ।मुझे मदमस्त मुगलिया सल्तनत की याद हो आई।जब एक कम्पनी ने मामूली से व्यापार की अनुमति माँगी और व्यापार शुरू किया।ईस्ट इण्डिया कम्पनी व्यापार के रास्ते यहाँ घुसी फिर उसने यहाँ की नब्ज़ पकड़ना शुरू किया।अकबर की बेमिसाल सल्तनत आखरी तक पहुँचते पहुँचते लोगों के दिलों से उतरने लगी।
कुल आबादी का दस से तीस प्रतिशत हिस्सा अपने ही हुकमुरानो के खिलाफ होता चला गया।ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने इस मुख़ालफ़त पर हाथ रखा और लोगों की तक़लीफ़ मरहम रखा,लालची लोगों के दौलत से मुँह भर दिए।बदला लेने वालों को हथियार दिए और धीरे धीरे एक समानांतर सरकार बना दी।कोई मूर्ख ही कहेगा की बिना जन समर्थन के अंग्रेजी हुकूमत यहाँ आई।कुछ प्रतिशत लोगों ने उनका साथ ज़रूर दिया और कमज़ोर होते बादशाह उसे रोक नही सके।समझदार बादशाह जनता में असन्तोष बढ़ने ही नही देता,वोह उनके दिलों को एक करते हुए हुकूमत अपने हाथ रखता।लुटने के बाद जागने वालों की मेरी नज़र में कोई जगह नही।
अब ज़रा आजकल का माहौल देखिये।चीन की ताक़त दुनिया में बढ़ी है।उसने हमे हर तरफ से घेर रखा है।हमारे सभी पड़ोसी उसके प्यादे बन चुके हैं।सड़क मार्ग से अब उसके घेरे में हैं।यह तो रही बाहरी किले बन्दी।अब अंदर देखिये।यहाँ जनता दिन बदिन बटती जा रही है।एक दूसरे से नफ़रत उफान पर है।आंकड़ा असंतुष्टों का वही पुराना तैयार हो रहा है।दस से तीस प्रतिशत आबादी अपनी ही सरकार में उपेक्षित है।सरकार सिर्फ सरकार बनाए रखने में व्यस्त है।वोह दिलों में और नफ़रत बढ़ाने के हर औज़ार का इस्तेमाल कर रही है।चाइना दूर बैठकर बड़ी आसानी से हमारे अंदर मौजूद बिखराव को महसूस कर रहा है।हम बेहद नज़दीक़ पहुँच चुके दुश्मन की जगह आपस में लड़ रहें हैं।इस चिंता को हवा में मत टालिए।
भूटान,तिब्बत,नेपाल सब अब चीन ही है।कल जब चीन सर उठाकर घुसे तब एकता की अपीलें फ़र्ज़ी साबित होंगी।अभी वक़्त है पूरे मुल्क़ को एक सिरे में बाँधे।आप अपने मुल्क़ के अंदर झाँक कर देखिये की सरहद वाले राज्य किस उठा पठक से गुज़र रहें हैं।नागरिकों में बढ़ते असन्तोष का बुरा असर होता है यह जितनी जल्दी समझ आ जाए उतना बेहतर।अगर तुमको लगता है की बड़ी आबादी में असन्तोष नही है तो फिर तुम शुतुर मुर्ग बने रहो।मैं चीन को लेकर बेहद सतर्क हूँ।जिसने बाजार को कब्ज़े में ले लिया वोह ज़मीन को भी कब्ज़ा सकता है मगर अभी तो हमे आपस में ही लड़ने से फुर्सत कहाँ।फिर कह रहें हैं जिस ज़मीन के नागरिक आपस में एक दूसरे को उसकी कमी दिखाकर नीचा दिखाने में लगे रहें उस ज़मीन का भविष्य उज्ज्वल तो नही है।
आप कुँए से बाहर निकलिए और चीन की हर हरकत पर एकबार नज़र तो डालिये।जिनको लगता है की हम क्यों सोंचे हमारी बाहुबली सरकार पर्याप्त है वोह वही लोग हैं जो ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लड़ने के लिए बहादुर शाह ज़फ़र को पर्याप्त मानते थे।जिन्हें लगता है की वाक़ई चीन खतरनाक स्तर तक पहुँच रहा है वोह अपने नागरिकों के दिलों को एक करने में लगे।उनके दिलों में उपजी दरारों को बन्द करने में लगे।दिलों में बढ़ती दूरियों को घटाने में लगे।
व्यापार का विरोध,चीनी सामान का बहिष्कार से काम नही चलेगा।पहले खुद एक हो।एक देश,एक आवाज़।यह सिर्फ मोहब्बत से हो सकता है।आपस में दूरियाँ बढ़ाकर हम दुश्मन से एक होकर तो हरगिज़ नही लड़ सकते।वैसे भी इतिहास में गुलामी की वजह देखते चलना।हर दौर में बीस,तीस, चालीस प्रतिशत लोगों के असन्तोष ने दूसरों को मौका दिया इस भूमि पर आने का और उस दौर के मूर्ख शासक इन बीस,तीस प्रतिशत लोगों के दिल तो जीत नही सके तो दुश्मन को क्या जीतते।
इस वक़्त केवल एक ही पैमाना है।जो अपने सभी नागरिकों से मोहब्बत करता है।उन्हें एक करता है।उन्हें अपना समझता है वही राष्ट्र प्रेमी है, वही लड़ भी पाएगा बाकि सब दुश्मन के साथ के लोग हैं।जाने अनजाने दुश्मन की ज़मीन तैयार कर रहें हैं।इसे पढ़कर आरोप प्रत्यारोप लगाकर अपनी मूर्खता का परिचय मत दीजियेगा।आपसे नही होता आप अपने में मगन रहिये और जश्न मनाइये।हम चीन की बढ़ती लालच से चिंतित हैं हम नागरिकों के दिलों को एक करने में लगे हैं, लगे रहेंगे।क्योंकि अपनी अंतिम साँस तक हम तो झुकने,बहकने वाले।जो खतरे को भाँप रहें वोह उठे और एक करें,जो मदमस्त हैं वोह इतिहास की गौरव गाथाओं को कुरेदें,जश्न मनाए और दिलों को रौंदकर अपने ख्वाब पूरे करें।
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