Friday, May 26, 2017

नेहरू पुण्यतिथि

वैसे इसे मत पढ़िए तो बेहतर है।आपको बड़ी तक़लीफ़ होगी।एक ऐसे शख्स को याद करके जिसे आपने हमेशा गिरोह के पन्नों में पढ़ा।खैर,जब दो टुकड़ों में देश मिला।वोह इसका रोना नही रोए।रियासतो का झगड़ा मिला।वोह इसका रोना भी नही रोए।शुरुआत में ही महात्मा का साथ छूठा।वोह इस ज़बरदस्त झटके के बावजूद भी मायूस होकर नही बैठे।अपनो ने जी भर कोसा।इसपर भी रोना नही रोया।दुनिया ने शक से देखा।उन्होंने उफ़्फ़ तक नाकि।मज़हबी रँग से उनपर कीचड़ फेका गया।वोह इसपर भी पलट कर नही मुड़े।तमाम विचार वादियों ने उनमे अपने आप को नापाकर खूब आलोचना की।उन्होंने तब भी इनमे से किसी एक को भी देशद्रोही या अपने रास्ते का कांटा नही कहा।बहुतों ने उनकी जड़ो में दही डालने का काम किया,उन्होंने उन्हें भी साथ रखकर दुनिया के सामने लोकतन्त्र  और धर्मनिरपेछता की वह मिसाल रखी जिसे आज भी कोई तोड़ नही पाया।

17 साल देश के शीर्ष पद पर रहे मगर कभी अपने आलोचको को नही दबाया।अडिग अपने काम करते ही रहे।देश की हर उस चीज़ जिसपर तुम फ़ख्र कर सकते हो,उसकी बुनियाद रखी।देश की भुजाओं को जिसने हर दिशा में फैला दिया।जिसकी छाँव में सब धर्म,सब विचार फलते फूलते रहे,उन्होंने किसी को जबरन नही रोका,इसी आज़ादी का तो ख्वाब बुना था।वह आधुनिक तो थे ही मगर उनमे ज़बरदस्त आध्यात्म भी था जो आपको नही दिखेगा।उनकी ज़िन्दगी के तमाम रँग बिखरे पड़े हैं, हर एक अपने मतलब का रँग लिए मतवाला फिरता है।

आपने तो उन्हें कुछ खास किताबो से जाना जिसपर उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में कभी रोक नही लगाई,जमकर अपनी आलोचना करने के मौके दिए।मैं मानता हूँ की गलतियां हुईं होंगी।निर्माण के मार्ग पर बहुत बार गलतियाँ होती हैं मगर इसका मतलब यह नही की वोह व्यक्ति पूरा गलत है।हो सकता है एक बेहतर मुल्क़ की तस्वीर बनाते में आपके धर्म को चोट पहुँची हो मगर उससे ज़्यादा ज़रूरी उन्होंने इसे एक किया।आज जो पाकिस्तान और आपमें फ़र्क है, जिसे आपको छोड़ पूरी दुनिया महसूस करती है।वह यह है की पाकिस्तान को नेहरू जैसा व्यक्तित्त्व नही मिला।वोह देश अस्थिर और असफल है।नेहरू ने हमे स्थिर किया और दिशा दी।

हाँ बात बात पर पहले पहले कहने वाले अगर देश के पहले प्रधानमंत्री को इज़्ज़त से याद कर लेंगे तो उनकी देशभक्ति कम नही पड़ जाएगी।मुझे भी लगता है जिसका कट्टर हिन्दू मुस्लिम विरोध करें,यानि वोह ही सही था।नेहरू में छिपी हर तरह की समझ को समझना मामूली बात नही है।नेहरू चन्द पन्नों के मोहताज नही।जो खुद मोटी मोटी किताबों को लिख गया हो उन्हें स्कूल के कोर्स के दो पेज से निकाल कर लोग अपनी ज़हनी कमज़ोरी और तंगनजरी के सिवा कुछ नहीं दिखाते।आज ही के रोज़ आपने एक कामयाब तारीख़ बना कर आखरी साँस ली थी।आज नेहरू की पुण्यतिथि है, हमे पता है उन्हें याद करने में बहुतों की साँस फूलने लगेगी।हर वोह व्यक्ति उन्हें याद करने में कतराएगा जो धर्म के तो करीब है मगर देश से दूर है।नेहरू जब तक हम हैं तब तक भले अकेले आपको याद करें,करते रहेंगे।मेरे देश के निर्माता आप ही हैं।कोई इसका चाहकर,जितना रूप बदलने की कोशिश करे,ज़र्रे ज़र्रे में पड़ी नेहरू की छाप को खत्म करने में उनके मुँह से ख़ून आ जाएगा,मगर वोह यह बिल्कुल भी मिटा नही पाएँगे।आज आपकी बहुत बहुत बहुत याद आती है पण्डित जवाहर लाल नेहरू।

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