कितना अजीब है न एक ही वक़्त में तीन या उससे ज़्यादा तख्त और तीनो का दावा की वोह सर्वोश्रेष्ठ हैं, विश्वगुरु हैं।एक तरफ रोम था जो पूरी शान ओ शौकत से चीखकर कह रहा था की वोह इस दुनिया का बादशाह है जबकि उसे खुद नही पता की दुनिया कितनी बड़ी है और वोह उसकी सिर्फ एक मुट्ठीभर ज़मीन का ज़ार,क़ैसर है।वही हाल भारत का था जिस वक़्त हम अपने विश्वगुरु होने का दम्भ भर रहे थे हमे यह तक नही पता था की कोई देश रोम जैसा ताक़तवर रहा है।बगल में चीन में बहुत बड़ी सल्तनत चल रही है।
यही हाल चीन का था उनके यहाँ उनका बादशाह ईश्वर तुल्य था।उनको लगता था वोह पूरी दुनिया का स्वामी है जबकि उन्हें खुद नही पता था की पड़ोस में कोई भारत देश दूर दूर तक एक झण्डे के नीचे बहुत कुछ गढ़ चूका है।वोह रोम से अंजान थे।यहाँ मकसद यह नही की हमे इन सल्तनतों का पोरस्मार्टम करना है बल्कि यह बताना है की कोई कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए अगर वोह आत्मुग्धता से बाहर नही आया तो वोह बहुत कुछ खोजने में असफल हो जाएगा।यह सबके सब अपने आप में ही सारी दुनिया देखते रहे।जब इनके एक आध लोग इधर से उधर गए तब उन्हें पता चलता की अरे ज़मीन और बड़ी है,वहाँ हमारे जैसे और बादशाह हैं।हर सल्तनत में बड़ी खूबियां रहीं हैं।हर एक अपने आप में महान भी है मगर सिर्फ वही महान नही है।
ईश्वर ने ज़मीन के हर हिस्से में हर तरह के प्रतिभावान लोग भेजें हैं इसलिए सर्वश्रेष्ठता का दम्भ नही रखना चाहिए।वैसे भी इतिहास की महानता की रेखाओं से बाहर निकल आओ आज देखो की तुम हो क्या।आज हमारा चरित्र निर्माण का है या विनाश का है।देखो हमे ज़रा से मामूली मुद्दों में भीड़ की तरह हाँक दिया जाता है।जिसको संवेदनाओ से खेला जाता रहा हो वोह मज़बूत सभ्यता की ईंट तो हो ही नही सकता।अभी वक़्त है अपने आप को विश्वगुरु होने के इतिहास के रट्टू तोते की जगह विश्वगुरु बनने का रास्ता बनाओ।इतिहास उठाकर देख लेना नफ़रत से भरे लोगों का झुण्ड सिर्फ खत्म हुआ है।मोहब्बत और सियासत के साथ दूर की सोच रखने वाले ने ही हज़ारों साल राज किया है।
अपनी अवाम को जोड़ो,जुड़ी हुई अवाम का नेतृत्व लम्बा चलता है।बिखरी हुई अवाम नेतृत्व को भी बिखेर देती है।अगर समझ सकना तो एक होना वरना आपस में नफ़रत करके जितना चाहो टूट लो और हाँ नफ़रत के लिए पग पग बहाने मिलते जाएँगे,करो नफ़रत जबकि मोहब्बत के लिए वजह तलाशनी होगी।मोहब्बत कमजर्फों के बस की बात भी नही।यह लिख लो पूरी दुनिया पर आजतक कभी किसी का राज रहा ही नही है।इसलिए जो हिस्सा तुम्हारे पास है उसे ऐसा सजाओ की वोह पूरी दुनिया लगे।जहाँ मौजूद इंसान दूसरी तरफ ललचाई नज़रों से न देखे।खैर न हो सके तो आपस में रहने वाले क्षेत्रीय भाई बहनो के क़त्ल पर खामोश रहो या जश्न मनाओ या उनके ख़ून को,गिलास में भर पीते रहो कोई फ़र्क़ नही पड़ता है क्योंकि हमारा इतिहास महान है।चियर्स।
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