अब बिखरे ख़ून की तस्वीरों से मन रत्ती भर विचलित नही होता।रोते बिलखते ज़ख़्मी बच्चों की तस्वीरें भी अब बुरी नही लगती।ख़ून से लथे पथे जिस्मों को देखकर रत्तीभर दिल पर फ़र्क नही पड़ता।वह बचपन था जब ऊँगली का हल्का सा ख़ून देखकर दिनभर का खाना छुट जाता था।किसी की पीठ पर बने छड़ियों के निशान को देख उस रात सो नही पाता था।अब कटे हाथ,उलटे पड़े नँगे जिस्म,मिटटी में लथड़े मरे जिस्म पर भिनभिनाती मक्खियों से अब फ़र्क़ नही पड़ता।अब सच बताए किसी के लिए कोई एहसास नही लगता।जिस दिन से समझदार हो गया उस दिन से संवेदना,दर्द,एहसास,सब खत्म हो गया जैसे आपका हो गया है।कितना खूबसूरत दृश्य है न दूर गोरे गोरे गालों पर ख़ून की छींटे।हैं न।काश काश यह हमारे आपके घर तक आ जाए ताकि करीब से इतने सुंदर दृश्य को देख पाएँ।दूर से ख़ून के धब्बे अच्छे नही लगते जब यह खूबसूरती आपके सफेद कपड़ो पर आ जाए तो आपको बहते ख़ून के पक्के धब्बे महसूस हों।आपको क्या लगता है यह ख़ून आपकी तश्तरियों में नही आएगा।किसी गफ़लत में मत रहिये ख़ून गाढ़ा भले ही होए मगर बहता बहुत तेज़ बहता है।ख़ून बड़ी तेज़ी से बड़ी से बड़ी आबादी को अपनी ज़द में ले लेता है।अरे वह नमूने तो और खूबसूरत लगेंगे जिनसे दुकानों पर टँगा गोश्त का टुकड़ा नही देखा जाता।जब उनकी गलियो से ख़ून बहेगा तो वह देखेंगे और मुस्कुराएंगे की यह मेरा ख़ून थोड़े है।यह तो अधर्मियों का ख़ून है, जिसे बह ही जाना चाहिए।जिसने जिसने ख़ून को त्यौहार की तरह मनाया है वह इसके हिस्सा बनेंगे ही।इतना तो मान ही लो हज़ारों की तादात में जब ख़ून बहता है तो उसमे कुछ ही गुनहगार होते हैं बाकि सब बेगुनाह।उन बेगुनाहो का ख़ून हमारी चाय की प्यालियों में रँग ज़रूर लाएगा।बेशर्मी से गेंहूँ के साथ घुन पिसने वाला मुहावरा मत देना क्योकि तुम्हारी नज़र में वह मौते घुन होंगी मेरी नज़र में वह मौत थी ,सिर्फ मौत।मैं तुम्हारी थालियों में ख़ून और गोश्त के टुकड़े को देख पा रहा हूँ।झूठ मत बोलना,तुम्हे ख़ून का मज़ा लग गया है।तुम्हारी ज़बान ने औरतों, बच्चों,आदमियो की उधेड़ती खाल और जिस्म के कच्चे लाल टुकड़ो का मज़ा ले लिया है।इनकार मत करना तुम्हारी हर मौत पर खुँशिया साबित कर चुकी हैं की तुम कितने मासूम हो।मेरी तो अब किसी भी ख़ून से कोई संवेदना नही।न कोई दर्द।न कोई तड़प क्योंकि मैंने अपने करीब के लोगों को लाशों पर ठहाके लगाते देखा है।यह लोग हर धर्म,हर जाति के हैं।यह हर रँग के झंडे के नीचे के लोग हैं जो अपने विपरीत के ख़ून पर ठहाके लगा रहे हैं।यह पूरी पृथ्वी के लोग हैं इन्हें ज़मीन के किसी एक हिस्से से जोड़ना बेईमानी होगी।मुझे पता है मेरे असनवेदनशीलता अभी उन लोगों को ज़रूर बुरी लगेगी जो पूरी संवेदनशीलता से ख़ून की तरफदारी करते रहे हैं।हमे अला फला दिन की याद दिलाएंगे।मुझे ख़ुशी है की यह ख़ून पर मुस्कुराते,तालियाँ बजाते,जश्न मनाते मेरे अपने हैं, जिन्होंने मेरी कमज़ोरी,मेरी संवेदना को मार डाला है।जिनकी सूरत इस ख़ून खराबे वाले दृश्य से मिल जाएगी वह अभी मुझ पर बरस उठेगा।उसके बरसने से अब मैं नही डरता क्योकि मेरी संवेदना पहले ही मर चुकी है।यह अभी आएँगे और अपने बहाए ख़ून का मौन समर्थन मुझसे भी मांगेगे।अभी यहाँ इतिहास,भूगोल,धर्म,राष्ट्र के नाम पर यह मुझे ललकारेंगे और मैं मरे हुए दिल और लुटी पिटी रूह के साथ इनका समर्थन करूँगा।तुम सही हो,तुम जो कर रहे हो वह सही है।तुम जो करोगे वह सही होगा।मेरा मुर्दा दिल कह रहा है तुम धर्म मार्ग पर हो,मेरा तुमको शत् प्रतिशत समर्थन है।©
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Monday, July 25, 2016
सुर्ख़ छींटे
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