हर कोशिश की शैतान नें एक मासूम इंसान को बहकाने की,लालच दी,ङराया,धमकाया ,समझाया मगर वह मासूम उसकी किसी भी कोशिश से नही फसा।,आख़िर में झल्ला कर उसने कहा यार मेरा एक़ मामूली सा काम करोगे,मासूम ने हांमी भर दी और पूछा क्या करना है।झट से शैतान ने कहा ये लो शीरा और इसे बस सामने जुम्मन की दुकान पर लगा दो।उसने ऐसा ही किया एक बूँद शीरा लगा दिया और पूछा इससे क्या होगा।तो शैतान ने कहा चलो दूर बैठ के तमाशा देखते हैं,कुछ देर बाद शीरे पर एक मक्खी आकर बैठ गयी।मक्खी देख छिपकली उसे खाने आ गयी।छिपकली पर एक बिल्ली लपकी,बिल्ली देख पास टहेल रहे शुक्ला जी का कुत्ता उस परटूट पडा।
जुम्मन ने कुत्ता देख गाली गलौज के साथ शुक्ला जी का कॉलर पकड लिया।यह बात दूर तक फैल गयी की एक मुसलमान ने हमारे पूजनीय शुक्ला जी पर हाथ उठाया, फिर क्या था पूरा शहर आग के हवाले हो गया,दोनो तरफ के सैकडो मासूम मार दिये गये,शैतान ठाहाके मारकर हसा और वो मासूम बेचारा उगली पर लगा शीरा देखता रह गया,शायद आप इतने मासूम नहीं।संभल जाइये ।मुल्क की बेहतरी के लगिए।अपना दिमाग खुला रखिए ताकि कोई आपसे शीरा ना लगवा सके ।आइये पूरी समझदारी से मुल्क को मज़बूत तरक्की के रास्ते पर ले जाएँ बिना बहके।ताकि हिंदुस्तान हमेशा खिलखिलाकर हँसता रहे।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Sunday, July 31, 2016
शीरा.....
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