करीब साल भर पहले कुछ लोग इंसान का क़त्ल करते हैं।वजह गाय।लोग गऊ रक्षक।इंसान के ख़ून का टीका गाय को।लगाया जाता है।मैं गाय के कान में पूँछता हूँ की हे माता क्या यह गऊ रक्षक हैं।तब वोह सुर्ख़ होकर कहती है की नही वह मानव भक्षक हैं।मेरे रक्षक नही।उसी दिन मैं इस शब्द को गढ़ता हूँ।धीरे धीरे मेरा यह लफ्ज़ मेरी गऊ माता को सही साबित कर देता है।
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