घुमो जितना घूम सकते हो।देखो जितना देख सकते हो।सोचो जितना सोच सकते हो।जुझो जितना जूझ सकते हो।यह ज़िन्दगी एक सफ़र है।सफ़र को जियो,महसूस करो यह तुम्हे इतना देगी की तुम सम्भाल नही सकोगे।मैं बात राहुल सांकृत्यायन की कर रहा हूँ।जिसने भाषा,रास्तों, देशों, विचारों, साहित्य,भूगोल,धर्म,कर्म सब कुछ एक जिस्म में समेटा था।अथाह ज्ञानी जिसकी क़द्र हमने सिर्फ किताबों में की,कोर्स में की मगर ज़िन्दगी में नहीं की।राहुल ने ज़र्रे ज़र्रे से इल्म और तजुर्बे को निचोड़ा, उसके पैरज़मीन के जिस हिस्से में पड़े उसने उस हिस्से के हर फ़न को उकेरा,उसे सहेजा,लिखा फिर हम सबके सामने रखा।वह गया जहाँ तक जा सकता था उससे भी आगे।उसने लिखा ताकि हम पढ़ सके।मै दावे से कह सकता हूँ राहुल जैसा दूसरा कोई नही बन सका आजतक।वह इल्म का ऐसा समन्दर था जिससे ज़मीन और आसमान बातें करते थे।अगर वक़्त हो तो राहुल का लिखा कुछ भी हाथ आए उसे उठा लीजिये,पढ़िए और देखिये की अभी ज़िन्दगी में आपने देखा ही क्या है।आप यूँही नही पैदा हुए है।ख़ाली कमाना, खाना,शादी करना और मरना आपका मकसद नहीं है।आप ज़िन्दगी की पहेलियां सुलझाइए।थोड़ा हो तो थोड़ा, बहुत हो तो बहुत मगर इर्द गिर्द के हर हिस्से को जानिए,लिखिए,सहेजिये।किसी दिन हम और आप भी मेसोपेटामिया और हड़प्पा मोहनजोदड़ो की तरह खत्म ही हो जाएंगे।तब जब सब खत्म होगा तो हममे से किसी एक का उकेरा,सहेजा,लिखा शायद किसी नई सभ्यता को हमारे होने का एहसास कराएगी।इतनी दूर का सोचिये जब सब खत्म होगा तब किसी पेड़ की जड़ से आपका लिखा आज कल में इतिहास। की रौशनी बनेगा।ज़रा भी गलतफहमी में मत रहिये खत्म हमे और आपको होना ही है, तो राहुल से सीखिये और निकल जाइये अथाह गहराई में,ऊंचाई में या जहाँ भी दम भर सुकून मिले।यही तो राहुल चाहते थे।यही तो हम चाहते हैं।यही तो आने वाली नस्ले चाहेंगी।राहुल की कलम की धड़कन को सुने और बढ़ चले अनंत की ओर.....#हैशटैग#hashtag
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