नरमी ऐसी की मोम भी उनसे सीखे।ताक़त इतनी की उस दौर में सबसे ज़्यादा।मोहब्बत इतनी की खुशबू अब तक है।इल्म इतना की इल्म का बादशाह।ख़िदमत ऐसी की मिसाल।या यूँ कहे हर फ़न में तारीख़ गढ़ने वाली मिसाल।यही तो हैं हज़रत अली।अथाह ताक़त के बावजूद दिल में अथाह नरमी।मेरा दिल जब डूबने को होता है तब उसे सहारा देते हैं अली।उनका किरदार बोलता है।आवाम के लिए उनके जिस्म का हिस्सा हिस्सा लगा था।अली ने सूफ़िज़्म की वह नीव रखी जिसकी आगोश में सारा जहाँ आ गया।जब उन्होंने मोहब्बत से बाहे फैलाई पूरी आवाम सर झुका के खड़ी हो गई।हर एक के सवाल,परेशानी,दर्द,तकलीफ़ में जिसने फाहे का काम किया वह अली थे।जब आँखों में अँधेरा और मुस्तकबिल में कालिख़ दिखी तब रौशनी का काम किया अली ने।मेरे अली ने हर दर्द में चीरा लगाया।हर तकलीफ़ में मरहम लगाया।इंसानियत को अपनी मोहब्बत और दूर की सोच से ऐसा रास्ता दिखाया की राह आसान हो गई।उनके सामने ज्ञान,कला,विज्ञान,धर्म,दृष्टि,विचार ने ऐसी तरक्की की की उसका असर आज तक है।अगर ज़रा भी दिल में काम की,इल्म की,मोहब्बत की,ख़िदमत की गुंजाईश हो तो हज़रत अली को पढ़िए।जिन्होंने हज़ारों साल पहले वह कह दिया जिसकी आज भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी तब थी।मुल्क,मज़हब,सोच,पार्टी का बन्धन खोलकर जब उन्हें पढ़ेंगे तब अली की दिखाई राह के मज़े ले पाएँगे जैसी सूफी आजतक लेते आए हैं।आज उनके पैदाइश मनाने से ज़्यादा उन्हें ज़िन्दगी में उतारने का वक़्त है।अली कल,आज और कल ज़रूरी रहेंगे क्योकि वह रौशनी हैं।इल्म की रौशनी।# hashtag #हैशटैग
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