Friday, April 29, 2016

मैं मज़दूर

कल 1मई यानि मज़दूर दिवस है।हमारी छुट्टी का दिन।हमारे आपके जैसों का दिन।हमारे साथियों का दिन।वह जिन्होंने हमारे घरों की नीव रखी।उसपर ईंटें रखी।दीवारें और छत रखी।जहाँ हम सब सुकून पाते हैं।उन सबको याद करने का दिन।विधान भवनों,राज भवनों,महलों और ऊँची ऊँची इमारतों को बनाने वाले मज़दूरों को याद करने का दिन।तपती धूप में पीठ से रिसते पसीने और जूझने की अमिट आत्माओं को याद करने का दिन।रिक्शा चलाती मोटी नसों वाले पैरों को याद करने का दिन।हमारे कूड़े जैसे जिस्म को ढोने वाले मेहनती बदनों को सलाम करने का दिन।आराम,जी वही आराम जिसे आराम बनाया है उन हाथों को चूमने का दिन।बोझा उठाए फ़ख्र से मज़बूत रीढ़ को सलाम करने का दिन।हम सबके मज़दूर होने का दिन।यह दिन सिर्फ प्रतीक भर है बस अगर दिल में इंसानियत है तो हर मज़दूर को अपनी तरह मज़दूर ही समझो।जो तक़लीफ़ तुम्हे होती है ऑफिस में,मैदानों में वह धूप से तपते,जिस्म को तोड़ते मज़दूरों को मत दो।दिल गवारा करे तो आज होली या ईद की तरह हर मज़दूर भाई से गले मिलो और कहो हम तुम एक जैसे हैं।तुम सूखे मैदानों के मज़दूर हो तो हम ढकी छतों के मज़दूर।आओ गले मिलकर यह फासला तोड़ दें।गले लगाए मज़दूर की तस्वीर डालो जैसे सेलिब्रिटी के साथ की डालते हो।उनको समझो,महसूस करो और अपने में घुल जाने दो तब तो मज़दूर दिवस है वरना यह दिन तो हर साल आएगा ही।हर तरह के मज़दूरों एक हो,एक यही हैं जो हर फ़र्क मिटा सकते हैं।

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