Monday, April 25, 2016

कंकर कंकर

तुमको लगता है तुम बड़े क़ाबिल और दिमाग में अव्वल लोग हो।झूठ।किसी झाँसे में हो।एक आजकी तारीख़ में अपनी ज़हेनियत को देखो और पलट कर इन्हें पढ़ लो जिन्होंने हमारे होने की नीव रखी।जब तुम बिखरे,टूटे,कमज़ोर से थे तब इन्होंने मोहब्बत से,खूबसूरत बोली और ज़बान से वह लिख डाला जिसने अनजान दिलों को एक कर दिया।इक दौर में मौलाना दाऊद ने चंदायन को लिख एक रौशनी दी क्या यह किसी ख्वाब से कम है।प्रेमवन जीव निरंजन को जब शेख रिज़्कुल्लाह मुस्तकी ने लिखा तब क्या दौर रहा होगा।बनने के उस दौर में सपनावती, मुग्धावती, मृगावती,मधुमालती,प्रेमवती जैसी मोहब्बत की दास्तान उकेरी गई।उस्मान,शेख नबी,कासिम शाह,नूर मुहम्मद,जान कवि,शेख निसार,शाह नजफ़ अली,ख्वाजा अहमद,शेख रहीम,कवि नासिर,अमीर खुसरु,मालिक मोहम्मद जायसी यह वह नाम हैं जिन्होंने हिन्दुस्तान की रूह को छुआ।जायसी ने तो पदमावत, अखरावट,आखिरी कलाम, महरी बाईसी यानि कहर नामा,चित्रलेखा,मस्लानामा,कन्हावत जैसी रचना करके एक शिखर बना डाला।यह वह वक़्त था जब कंकर कंकर जुड़ कर इमारतों की तामीर हो रही थी।तो जब सदियों पहले यह कारनामे किये जा सकते थे तो आज क्यों नहीं।आज किसी की कलम दिलों को क्यों नही जोड़ती।आज किसी की ज़बान दिलों का दर्द क्यों नही दूर करती।हाँ अगर आजभी आपकी ज़बान,आपका दिल आपकी रूह सच्ची हो तो हर लफ्ज़ असर करेगा।दिलों में उतर कर असर दिखाएगा।हमें भी पुरखों की तरह आज दिल जोड़ने वाली कलम तराशनी होगी।सच्चाई और मोहब्बत की सियाही डालनी होगी।आज हमे जायसी और खुसरु की ज़रूरत पहले से ज़्यादा है।कुछ नही तो यही पढ़कर ज़बान को खूबसूरत बना लो दोस्त।दिल को दिल बना दो।वक़्त लगेगा मगर होगा।

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