Saturday, April 23, 2016

सच बनाम सच

एक सूफ़ी थे उनकी खुशबू हर तरफ फैल चुकी थी।एक रोज़ वह एक क़स्बे में दाख़िल हुए।वह क़स्बा बेहद तरक्कीपसंद और अक़लमन्दो का था।उस क़स्बे के सबसे काबिल शख़्स ने अपनों से वादा किया की इनका ढोंग आज यहीं खत्म होगा।रात हुई वह सूफ़ी के खेमे में पहुंचा और उनके पाँव पकड़ लिये।सूफ़ी ने उसे देखा और कहा क्यों परेशान हो।उसने कहा पीर जी बड़ी बेचैनी है,सच की तलाश की बेचैनी,ख़ुदा के सच की बेचैनी सोने नही देती।आप बताइये सच क्या है।खुदा क्या है।पीर जी ने कहा तुम्हे नही पता ख़ुदा क्या है।जी,नही पता तभी तो आपके पास आया हूँ।पीर ने कहा जब तुम्हे नही पता तो कैसे जानोगे की सच क्या है।आप बताइये।पीर ने कहा यह जो लालटेन लिए हो यही ख़ुदा है,यही सच है।यह कैसे हो सकता है मेरे पीर।पीर मुस्कुराये और कहा यह जो मिठाई है यही तो सच है, ख़ुदा है।वह फिर मायूस हुआ।अच्छा वह जो दूर आसमान में तारा दिख रहा है वह ही ख़ुदा है।वह माथे पर त्यौरियां दे सुर्ख़ हो गया।फिर पीर ने पोटली से एक ऐसी चीज़ निकाली जो उसने कभी नही देखी थी पहले।पीर ने कहा यही तो ख़ुदा है,यही तो सच है।जब उसने फिर इनकार किया तब पीर ने उसके सर पर हाथ रखते हुए कहा की भटकना बन्द करो।अगर तुम्हे नही पता होता की ख़ुदा क्या है, सच क्या है तो तू कबका मेरी पहले ही बताई हुई चीज़ को सही मान लेता।तुम्हे पता है की सच क्या है।अपने काम और ज्ञान में वक़्त लगाओ।उन सवालों में मत उलझो जिनके जवाब तुम्हारे ही अंदर हैं।तुम जिसे भी सच मानते हो उसे पकड़े रहो,उससे मोहब्बत करो और उसकी खुशबू को महसूस करो।फालतू की बहसों से सिर्फ मायूसी हाथ आएगी।मेहनत करके दुनिया को खूबसूरत बनाओ मेरे दोस्त।तुममें इतनी सलाहियत हैं की तुम लोगों की ज़िन्दगी आसान कर सकते हो लेकिन तुम गैर ज़रूरी सवालों में उलझे हो।आगे बढ़ो विज्ञानं से ख़ुदा या सच मत ढूंढो पहले इस दुनिया को आसान करो,तकलीफो को दूर करो।ख़ुदा के जानने से ज़्यादा ज़रूरी है तुम बीमारिया जानो उनके इलाज में लगो।फसलों को बढ़ाओ।बच्चों की तालीम और तरक्की में लगो।वह ज़ार कतार रोता रहा वह इस बार वाक़ई सूफ़ी के पैरों में गिर पड़ा।

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