खँडहर की दरकी हुई दीवारें, उनपर काई से पनपी कालिख़।दर और दरवाज़े।ख़ाली ताखें और सुनें फाटक।यह तस्वीरें हैं हमारे हैरिटेज की।हर दर ओ दीवार हमे रोकती है, पकड़ती है, खींचती है।अपनी दास्तान सुनाना चाहती है।बेवक़ूफ़ खण्डहर।यहाँ दिल और रूह खण्डहर हुए जा रहे हैं, यह अपनी दास्तान सुनाने को बेचैन हैं।मैं जानता हूँ तुममे आज भी हज़ार किस्से दफ़न हैं।तुममे मेरे पुरखों की रूह है।उनके बचपन की शरारतो से आखरी साँस तक के पल कैद हैं, मगर क्या करें।ज़िंदगी दाल चावल से निकलने नही देती।आज विश्व हैरिटेज दिवस है।इण्डिया गेट,लालकिला,ताजमहल,इमामबाड़ा,हवा महल जैसी किस्मत सबकी नही हैं।यहाँ भी हमने क्लास बना रखा है।छोटे और कमज़ोर खण्डहर आज भी हमारे नज़र नहीं आते।इन्हें देख कर दिल कचोटता है।रसमन ही सही जी चाह रहा है पास के किसी खण्डहर की दीवार को गले लगा लूँ।उससे पूंछू की दोस्त कितने खुशहाल थे तुम।तुम्हे पता है हमने कितनी गलतियां की हैं, तुमही उन्हें महसूस कर सकते हो।ऐ खण्डहरों हमे खण्डहर होने से पहले सीधी राह दिखा दो।आज तो तुम्हे मना ही रहे हैं, बसतुम हमेशा ज़हन में रहो जब तक हम सब हैरिटेज नही हो जाते।
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