जब हम ज़बान,ज़ायके और ज़िन्दगी की गिरह सुलझा रहे थे।हर चीज़ के बनने बिगड़ने में प्रयोग कर रहे थे।जब इंसान और जानवर के दरमियानी फासला कम था।तब उसने एहसास कराया की हम इंसान हैं।उसने बताया दो हाथ और पैरों का सिर्फ यह काम नही है खाना और खाना।हमे अपने इर्द गिर्द हर चीज़ के लिए जीना होगा।हम ख़ुदा की बनाई हर शय की हिफाज़त और ख़िदमत के लिए हैं।उसने ज़बरदस्त राजसी ज़िन्दगी को ठुकराया।जंगलों में टहला, भूख और प्यास में उस ताकत का एहसास किया जिसने हमारी रूहों को बनाया।उसने ज़िन्दगी को इतना तपाया की उसका जिस्म कुंदन हो गया।ईसा मसीह से 599 साल पहले उसने दुनिया को एक विचार दिया,सिद्धान्त दिया।ऋषभ देव से चली सीढ़ियों में 24वें नम्बर पर उसने रौशनी दिखाई।वैशाली में त्रिशला और सिद्धार्थ के आँगन में वह वर्धमान पैदा हुआ।जिसने अपनी ज़बरदस्त वैचारिक ताकत से और तप त्याग से दुनिया के सामने महावीर स्वामी नाम दिया।अहिंसा,सत्य, अपरिग्रह,अचौर्य और ब्रह्मचर्य के वह पाँच नियम दिए जिनके सामने ज़माना झुक गया।जँगल ने नगरों को जीने का सलीक़ा दिया।मैं महावीर स्वामी की जूझने,समझने,प्रयोग,तप,त्याग को देखता हूँ,सोचता हूँ हज़ारों साल पहले यह कैसे मुमकिन था,लोगों को,आदिवासियों को इंसानियत से कैसे जोड़ा उन्होंने।आज सब कुछ है मगर हम चाह कर भी इंसान को इंसान होने का एहसास नही करा पा रहे हैं।जानते हैं क्यों हममे महावीर का रत्ती भर भी सच,लगन, त्याग नही है।आइये महावीर को याद करने की जगह आज महावीर जयंती को उन्हें ज़िन्दगी में उतारे।ख़ुदा के एहसास को जियें।जहाँ सिर्फ मोहब्बत हो।मोहब्बत।#hashtag #हैशटैग
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