Thursday, April 28, 2016

मोरी गंगा रे

उसकी अँगड़ाई,
उसकी चंचलता,
उसका अल्हड़पन,
यही तो है मेरी गंगा।
उसकी मुस्कान,
उसका बहाव,
उसकी तरलता,
यही तो है मेरी गंगा।
धोती हुई पाप,
पोछती आँसू,
देती है मुक्ति,
यही तो है मेरी गंगा।
माँ का आँचल,
बहन का समर्पण,
पत्नी का साथ,
यही तो है मेरी गंगा।
थाम लो,
संवार दो,
निखार दो,
जैसे थी मेरी गंगा।
भविष्य कहेगा,
समय बोलेगा,
बच्चे पढ़ेंगे,
यही तो है मेरी गंगा।
हम सबकी गंगा।
ज़मीन ओ आसमान की गंगा।
यही तो है मेरी गंगा।।।।।।।।।।।।

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