मेरे राम।।।वाकई एक ऐसा किरदार जिसनें मुझे हमेशा एक रास्ता दिखाया।जिनसे मामूली से मामूली इन्सान की अहमियत सीखी।मेरे राम नें मुझे माँ की ख्वाहिश को किसी भी हाल में पूरा करने के लिए मज़बूती से खड़ा किया।राम हमारे दिल में हैं वह ज़मीन के किसी हिस्से में क़ैद नही हो सकते।आप उनके लिए लड़िये झगड़िये जीभर ख़ून बहाईए,दिलजोई करिए मगर दावे से कह दूँ मेरे राम आपकी इन हरकतो से खुश नही होंगे।
मै अयोध्या की ज़मीन में खूब गया महसूस भी किया।नंगे पैर उस ज़मीन पर घंटो टहला।राम के पैरों की धूल को महसूस किया ।सरयू के पानी में उतर के राम से बाते भी की वह राम थे जो सरयू के पानी से भीगे चेहरे से मेरे आसूँ पहचान गए और हाँ जब मै परेशान हुआ तो मेरे राम ने कहा मत हो मायूस।
मैं जहाँ था वही हूँ और वही रहूँगा।मस्जिद भी मेरा घर थी मंदिर भी।जिसनें भी मेरा घर तोड़ा वह नासमझ थे।वह इन चार दीवारो में मुझे ढूँढ रहे थे।अगर वह वाकई मुझे चाहते तो अपने दिल में झाँकते।उन्हे मानवता दिखती।वही तो मैं था उनका राम।।।
ज़मीन का जो हो वह कोर्ट तय करेगा बस इतना याद रखे अगर दिल में राम हैं तो कोई बाबर की ताकत नही वहाँ से राम निकाल सके।मैं ज़बानी रामभक्त नही बल्की उनको ज़िंदगी में उतारने वाला राम का प्रेमी हूँ।तुम्हारी दिलों को बाँटने वाली तकरीरें यहाँ नही चलेगी क्योंकि यह राम का सच्चा घर है।
राम का घर।हो सकता है आपको यह सिर्फ़ पोस्ट लगे।लगे तो लगे।अगर वाकई आपके भी दिल में राम होंगे तो इस कैफ़ियत को समझिएगा।मोहब्बत कीजिएगा।मानवता और मर्यादा की इज़्ज़त कीजिएगा।यही हैं मेरे राम।।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Monday, December 5, 2016
मेरे राम
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