पोटली से ....
आप लिखते थे क्योकि लिख सकते थे तब क्या आपने सच लिखा।आप डॉक्टर थे तब क्या आपने पेशे के साथ वफ़ादारी की।आप टीचर थे तब क्या आपने बच्चो को अपना बच्चा समझ के पढ़ाया।आप क्लर्क थे तब क्या आपने ईमानदारी अपनाई।आप पत्रकार थे,वकील थे,जज थे या कुछ भी थे तब आपने मुल्क के साथ वफ़ादारी की।अगर आप बेरोज़गार हैं तो क्या आपने रोज़गार ढूढने या नया पैदा करने में वक्त लगाया या लकीर पीटते रहे।मैं देशभक्ति का रोज़ सीना पीटने वालों से डंके की चोट पर पूछ रहा हूँ क्या उनका हर कदम हमारे मुल्क को आगे बढ़ा रहा है?देशभक्ति की चादर ओढ़कर निकम्मेपन और बेईमानी को छुपाना बड़ा आसान है मगर कब तक एक न एक दिन माटी हिसाब लेगी ही।
सियासत पर उगली उठाना सबसे आसान और मज़ेदार शगल है।अपने पेशे से ईमानदार होना और मुल्क को अपनी जान से भी ज़्यादा एक करनें में लगना कठिन तपस्या है।आपमें ज़रा भी मुल्क से सच्ची मोहब्बत है तो लग जाईये।ईमानदारी से काम करिए।यूँ भाजपा और काँग्रेस को कटघरे में खड़े करते हुए अपनी नाकामियों पर पर्दा मत डालिए।कोई भी मुल्क तरक्की अपने नागरिकों की सोच और काम से करता है।सियासत के गिरहबान में झाँकने की जगह अपने काम को देखिए।परिकथाओ से बाहर आईये।
कोई लीडर नही आएगा आपको विकसित करनें।फ़र्ज़ी लीडर ख्वाब दिखाकर चने के झाड़ पर खड़ा करना अच्छे से जानते हैं।नीचे देखो की तुम्हारे पाँव ज़मीन पर हैं या नही।सच्चाई देखकर कदम बढ़ाओ।अपने बीच से ही वैञानिक पैदा कीजिए जो आपकी ज़िंदगी को आसान करे।यह बाते कोरी कल्पना नही है।अपना लीजिए ईमानदारी और मेहनत।वादा है हम तरक्की कर लेंगे।आज नही तो कल मगर ज़रूर।आईये साथ चले,साथ बढ़े,ईमानदारी से मुल्क की वफ़ादारी करें।
ज़बानों से रटने की जगह दिल में उतार ले देशप्रेम।प्रेम भक्ति से हमेशा आगे था,है और रहेगा।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Friday, December 9, 2016
होश में आओ
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hafeezkidwai
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