आज खुश तो बहुत होंगे।बेहद खुश।थोड़ा सा इस ख़ुशी की वजह भी देख लें।उन लोगों को भी देख लें जो अपना सबकुछ खत्म करके इस ख़ुशी के लिए खत्म हो गए।जिन्होंने बिना यह ख़ुशी देखे,अपनी पूरी ज़िन्दगी क़ुर्बान कर दी।एक बार उनको याद कर लीजिये।जिनकी ज़बानों पर उन लीडरों के लिए अनाप शनाप लफ्ज़ आते हैं, वह वही हैं जो ज़रा सी लालच में अंग्रेज़ों के सामने घुटने के बल पर बैठ जाते थे।जो ज़रा सी सख्ती में सैकड़ो पेज की माफ़ी माँग कर खुले घूमना चाहते थे।एक बार उठिये देखिये सलाखों में कौन कौन था।उन सलाखों में किसने माफ़ी नही माँगी।किसका पूरा परिवार जेल में था।किसका सबकुछ कुर्क हो गया था।किसको अपनी बीबी और अपने साय जैसे साथी की चिता को आग जेल में रह कर देनी पड़ी।वह कौन था जिसके भाई के टुकड़े उसके आँगन में डाल दिए गए।वह कौन था जिसका जवान बेटा फाँसी पर था।उस बाप को जानिए जिनका इकलौता बेटा अंग्रेज़ों की गोली खाया और बाप फाँसी।उन्हें अपने कुल की चिंता नही थी क्या।थी,वह भी चाहते थे जीना।उन्हें भी ज़िन्दगी में सुकून प्यारा था।वह अपनी पीठ पर लाठी नही खाना चाहते थे।कोई आदमी अपनी बेटी और बहन और बाप को जेल में नही देखना चाहता था।यह सारे लोग बढ़िया ज़िन्दगी गुज़ार सकते थे,मगर नही गुज़ारी।क्योकि यह हमारे चेहरे पर ख़ुशी देखना चाहता थे।वही ख़ुशी जो आज हर हिंदुस्तानी के होंट पर मुस्कुरा रही है।तो एक बार उस पूरी परम्परा,संघर्ष और उस दौर की सोच को याद कर लीजिए और आज़ाद हो जाइये।हर बुराई से आज़ाद।सम्प्रदायिकता और नफ़रत से आज़ाद।काहिली और अन्धविश्वास से आज़ाद।आइये 70वीं आज़ादी को हर उसके साथ सेलिब्रेट करें,जिनकी चौखट पर आज़ादी संकरी हो रही है।जब हर होंट पर मुस्कान होगी,तब हमारी,आपकी और हमारे पुरखों की आज़ादी होगी।ज़िंदाबाद ऐ मेरे हिंदुस्तान ज़िंदाबाद। ©
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Sunday, August 14, 2016
15 अगस्त
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hafeezkidwai
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