Saturday, August 6, 2016

दोस्त

तुम्हारे पास अगर एक के अलावा पेन्सिल हो तो देदो,मैं भूल गया लाना।दूसरे ने पेन्सिल देदी और इस तरह एक सहयोग का रिश्ता बढ़ा।धीरे धीरे बातों,खेल और फिर होमवर्क साझा करने का रिश्ता बना।वक़्त और बीता तो टिफिन शेअर करने की भी नौबत आ गई।यह वह रिश्ता था जो एक मामूली सी ज़रूरत से शुरू हुआ और बिला ज़रूरत परवान चढ़ता गया।वह एक लड़का पेन्सिल के सहारे सामने आया और दिल में घर कर गया।यही तो दोस्ती है।मेरा मानना है की दोस्ती की पहली सीढ़ी ज़रूरत और सहयोग की होती है जो आगे बढ़ते बढ़ते निःस्वार्थ होती जाती है।फिर एक वक़्त वह दोस्त हमारे ख़ून के रिश्तों को फाँदकर ज़िन्दगी का हिस्सा हो जाता है।यह जो दोस्त होता है न यह हमारा चुना हुआ रिश्ता होता है।ख़ालिस हमारा चुना।न इसमें कुंडली होती है, न पण्डित,न कोई बड़ा बूढ़ा और ना ही कोई कोर्ट वोर्ट।पता नही वह क्या होता है की ज़िन्दगी में दाखिल हुआ दोस्त इतना अपना हो जाता है की वह मेरी उन बातों का राज़दार हो जाता है जो समाज,परिवार,खानदान,संस्था किसी को नही पता होती है।दोस्ती का रिश्ता एक ज़रूरत से शुरू होता है और धीरेधीरे ज़रूरतों को छोड़ आगे बढ़ जाता है।यह कोई ठोस नियम नही है की बचपन का ही दोस्त वाक़ई दोस्त हो।बहुत बार जवानी या उसके बाद या फिर बुढ़ापे में हमको सच्चा दोस्त मिलता है।जिसे जितनी जल्दी मिल जाए,वह उतना किस्मतवाला।मैंने सोचा की चलो आज सभी दोस्तों के नाम लिखेंगे।तो लगा पोस्ट तो नॉवेल हो जाएगी।फिर भी बहुत से दोस्त हैं जिन्हें मैं याद करना चाहता हूँ।मैं उन्हें महसूस कर सकता हूँ।वह हमे सालों न मिले,मगर मेरी ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं वह।मेरे वह दोस्त मेरी किसी कामयाबी,नाकामयाबी में शामिल नही होते।उन्हें नही मतलब मैं क्या कर रहा,कैसे कर रहा,क्यों कर रहा,बस मैं हूँ,तो वह हैं।मेरे काफी दोस्त रोज़ मिलते हैं वह मेरे लिए मेरी साँसे हैं, इसलिए रोज़ ज़रूरी हैं।कुछ महीनो में मिलते हैं, तो वह मेरे लिए बेहद अहम् हैं, अगर वह न हों तो अगला महीना कैसे आए।बिना उनके मिले मैं महीना खत्म मानता नहीं हूँ।मेरे सभी दोस्तों का मुझपर हक़ है,मैं चाहकर भी उन्हें टाल नही सकता।अलग अलग फ़ील्ड के मेरे दोस्त मुझे हर फ़ील्ड में ज़िंदा रखते हैं।मेरा भी मानना है जिसके साथ मुझे चाय पीने का मौका मिल गया,वही तो मेरा दोस्त है।हर उम्र के दोस्तों की वजह से कभी अपनी उम्र का अंदाज़ा भी नही होता।हर शौक़ के दोस्तों की वजह से अपने शौक़ भी नही पता चलते।हर फील्ड के दोस्तों की वजह से अपनी फ़ील्ड भी नही पता।हर धर्म के दोस्तों ने मेरा धर्म ही धुन्धला कर दिया।यह जो दोस्त हैं न,यह बड़े बदतमीज़ हैं।यह आपको बदल कर रख देते हैं।वैसे एक चीज़ गाँठ बाँध लीजिये की कभी कोई दोस्त मासूम नही होता है।वह आपके लिए सबसे नटखट ही होगा।वह आपसे लड़ेगा,तफ़रीह करेगा,धमकाएगा, झगड़ेगा और फिर हँस के मिलेगा।मैं रोज़ अपने दोस्तों के इर्द गिर्द रहता हूँ,ज़्यादतर दिमाग में।मैं अपने सभी दोस्तों के साथ हूँ,हमेशा।मैं उनके दिलों की धड़कन सुन सकता हूँ,वाक़ई।मेरे लिए मेरा बहुत कुछ मेरे दोस्त ही हैं।चलो,चाय पियें।चाय ही तो हमे जोड़ती है न दोस्त।तुम तो जानते होगे।हम,दोस्त और चाय।वाह क्या सीन है, और हाँ चाय। ©

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