Sunday, August 7, 2016

विशाल पाण्डेय

मेरे लिए तुम क्या थे
एक नाम,एक सहारा
वक़्त काटने की 
वजह
नही नही
हरगिज़ नही
मेरे लिए तुम थे
एक वजह
मेरे होने की वजह
मेरे हँसने की वजह
मेरे बढ़ने की वजह
एक रोज़ हम बड़े हो गए
खत्म हो गई वजहें
तुम दूर निकल गए
मैं वही
हाँ वही
तुम्हे जाता देखता रहा
तुम दूर निकल गए
इतनी दूर की जिस्म
धुन्धला गया
मगर
तुम अब भी हो
वैसे ही
माथे पर तिलक लगाए
मुस्कुराते हुए
विश्वास से भरे
मेरे सामने
मेरे साथ
मेरे अंदर
मुझमे
मेरे दोस्त
विशाल तुम यहीं हो
हाँ यही
मुझमे

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