Thursday, August 11, 2016

यह जिस्म

देखिये आपके बदन में कुछ तक़लीफ़ हो जाए।दाना या फोड़ा निकल आए, तो तक़लीफ़ होगी।एक पैर सड़ जाए तब भी शिद्दत की दर्द होगी।पूरा बदन खराब हो जाए,तब दर्द से बिलबिलाएंगे मगर बदन छोड़ नही देंगे।बदन से मोहब्बत कम नही होगी।अपने बदन को कोसने तो नही लगेंगे।तक़लीफ़ के बावजूद थोड़े बचे साफ़ जिस्म की खूब हिफाज़त करेंगे।रूह जब जिस्म छोड़ेगी तब ही सब खत्म होगा,वरना जैसा भी है हम जिस्म को चलाए रखेंगे।यह जो मुल्क़ है न,यह हमारा बदन ही तो है और हम इसकी रूह।
एक बात दिमाग में बैठा लीजिये एक पार्टी या एक नेता के आ जाने से हम अपने मुल्क़ पर ऊँगली नही उठाएँगे।चाहे यहाँ पूरी आबादी भेड़िया हो जाए फिर भी मैं अपने अंत तक अपने देश को नीचा नही दिखाऊंगा।हम जूझेंगे,बीमारी से लड़ेंगे,मगर अपने जिस्म को बदनाम थोड़े ही करेंगे।यह मेरा देश है, हमे इससे अथाह मोहब्बत है।मोहब्बत में खूबसूरती,बदसूरती नही देखी जाती।मेरे खिलाड़ी चाहे हारे या जीतें मगर हम उनके साथ हैं।मेरी मुल्क़ के लिए मोहब्बत किसी की हार जीत से नही तय होगी।किसी के कुर्सी पर बैठने या न बैठने से तय नही होगी।किसी का साथ देने या न देने से तय नही होगी।मेरी मोहब्बत मेरी ज़मीन से तब तक रहेगी जब तक मुझमे रूह है।मैं किसी पार्टी,किसी नेता,किसी लेखक के बहकावे में अपने मुल्क़ पर कभी कीचड़ नही उछाल सकता।पन्द्रहियो भूखा रहूँगा मगर अपने मुल्क़ पर भूख का ठीकरा नही फोडुंग।बहुत लोग लिख देते हैं यह देश अब इनके,उनके,फलाने,ढीमाके के लायक नही रहा,तो भाई यह मुल्क़ आपके लायक हो या न हो,मेरे लिए यह मेरी इज़्ज़त है, मेरा जिस्म है।देश का कोई लीडर जब विदेश में अपनी गन्दी सियासत की वजह से हमारे देश पर सवाल उठाता है, वह उसी दिन हमारी नज़र से गिर गया।देश में मौजूद आजकल के सारे हिँसक संगठन चाहे जितने ताक़तवर हो जाएँ, चाहे हर नागरिक इसका सदस्य हो जाए,फिर भी अंत तक हम अपनी ज़मीन,अपने मुल्क़ को नही कोसेंगे।लोगों के बुरा होने से मेरी ज़मीन कभी बुरी नही हो सकती।आपको भी इस भारत भूमि को समझना होगा।इसकी मोहब्बत को छूना होगा।इतना ख्याल रखिये की चाहे कुछ भी हो जाए,मुल्क़ को नीचा नही दिखाना है।लोग तो आते जाते रहेंगे।कुर्सिया बदलती रहेंगी,मगर मेरी माटी हमेशा उपजाऊ रहेगी।उसकी ताक़त हमारी मोहब्बत है।जो जो मोहब्बत में कमी कर रहा है, नफ़रत को बढ़ा रहा है, वह हमे आपको नही,बल्कि भारत भूमि को धोखा दे रहा है।वह हमारी ज़मीन का गुनहगार है।वह हमारी माटी को तड़पा रहा है।हम और आप मोहब्बत से रहकर अपनी माटी,अपनी भारत भूमि को सुकून दे।लोग चाहे जितने बुरे,हिँसक, अपराधी हो जाए,हम अपनी माटी को अपनी मोहब्बत से इनकी लगाई तपिश से बचाए।हम सबसे पहले हमारा देश है।हमारा अपना भारत।जिसकी महानता सिर्फ़ और सिर्फ़ मोहब्बत,भाईचारा है। ©

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