मेरी टीशर्ट में एक तिरँगा झंडा लगा हुआ था।लगा नही बल्कि लगाया गया था।मेरी क्या मेरे साथ के सभी लोगों के कपड़ो में वह छोटा सा तिरँगा लगाया।हमने पूछा की भाई यह क्यों।तो वह बोले यह हमारी मुहीम का हिस्सा है।मेरी उत्सुकता बढ़ गई।यह कैसी मुहिम।तो वह बोले की आने वाले हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को हम झण्डा बाँटते हैं।हमारी मुहिम है "हर हाथ तिरँगा"।फिर वह बताते रहे की पिछले चार सालों से वह यह कर रहे हैं।फिर हमने पूछा की इसकी ज़रूरत क्या है तो वह हैरत से हमे देखने लगे।गम्भीरता से कहा की आने वाला वक़्त प्रतीकों की लड़ाई का है।मामूली से मामूली प्रतीक भावना भड़काने के काम आएँगे।ऐसे में अगर हमने आगे बढ़कर अपने प्रतीक, अपनी विरासत को नही सम्भाला तो यह गलत हाथों में चले जाएँगे।जिससे हमारे मुल्क़ का बड़ा नुकसान होगा।हम हैरत से इस मामूली सी मुहीम की गहरी पृष्ठभूमि को देख पा रहे थे।उस दिन से हर हाथ तिरँगा हम सबकी मुहिम हो गई।धीरे धीरे वक़्त गुज़रा,कारवाँ सैकड़ों से हज़ारों में पहुँच गया और हर हाथ तिरँगा मुहिम वाक़ई ज़्यादतर हाथों में पहुँच गई।यह बड़ा काम और गहरी समझ मोहम्मद अनस गुरु की थी।बहराइच ज़िले से शुरू यह कदम आगे बढ़ गए।बिना लाग लपेट उनका एक ही मकसद है की कम से कम इन दो दिनों में हमारी यह कोशिश रहे की हम तिरँगे के सहारे बहुरंगी भारत को महसूस कर पाए।हम आज जब बात बात पर प्रतीकों पर लोगों को भड़कते,बिखरते देखता हूँ तो मुझे हर हाथ तिरँगा मुहिम की अहमियत पता चलती है।वह इंसान अपनी कोशिशों से देश की साँझी विरासत को सींच रहा है।मोहम्मद अनस गुरु जैसे शख्स हमारी उम्मीदें हैं।जिन्होंने तमाशे में नही बल्कि काम करके हमारे देश के मूल्यों को समेटा है।आज ग्यारह साल हो गए "हर हाथ तिरँगा" मुहिम को,आज भी वह अपने दम पर करीब दो तीन हज़ार झण्डे बाँटेंगे।यह मुहिम बिना किसी लाभ के,बिना लालच के,बिना तमाशे के ग्यारह सालों से चल रही है।मुझे अनस गुरु की टीम पर फ़ख्र है की यह बिना दिखावे,बिना शोशेबाज़ी के अपने देश प्रेम को लोगो में बाँट रहे हैं।वक़्त हो और लगे की यह तरीका सही है तो दो झण्डे खरीदिए और दो हाँथो में पकड़ा कर "हर हाथ तिरँगा" को आगे बढ़ाइए।अपनी तस्वीर हर हाथ तिरँगा के साथ साझा कीजिये ताकि यह गूँज देशभर में देखि जाए।अमन,मोहब्बत,मुल्क़ की तरक्की की नियत के साथ अपनी कोशिश से हर हाथ तिरँगा का हिस्सा बनिए।हम मोहम्मद अनस गुरु उनके साथी नौशाद,अमित कश्यप,साहिल हिन्द,अनुराग शुक्ला, हसीब भाई,आशीष यादव,सचिन शर्मा,मोहम्मद कैफ़ और दूसरे साथियो को हौंसला दे सकते हैं।इनके जैसे शख्स की मदद अपनी इन छोटी सी कोशिश से कर सकते हैं।इस बार भी हमेशा की तरह ख़ुदाई खिदमतगार संगठन उनके साथ है।हम सबको फ़ख्र है इस कोशिश का हिस्सा बनने का।हमारी छोटी छोटी कोशिशें, हमारे मुल्क़ को मुस्कुरा सकती हैं।सलाम सभी जूझने वाले साथियों को।©
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Friday, August 12, 2016
हर हाथ तिरँगा
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