Sunday, June 12, 2016

समान शिक्षा

वोह इस कड़ी धूप में बैठे हैं।भूख लगी है बेहद,मगर सुधार की भूख।प्यास से जिस्म बेहाल है,वह प्यास जो बच्चों को,गरीब,अमीर सबको एक साथ देखना चाहती है।हम और आप IIT, AIMS केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तो भीड़ लगा कर जाना चाहते हैं मगर जब बात बेसिक शिक्षा की हो तो प्राइवेट स्कुलो की तरफ रुख करते हैं।वजह साफ है चरमराई शिक्षा व्यवस्था।इसका एक ही विकल्प है की सभी सरकारी कर्मचारियों के बच्चो का सरकारी स्कूलों में पढ़ना आवश्यक कर दिया जाए।चाहे एस पी,डीएम हो या मुख्य सचिव।सबके बच्चे,हमारे आपके बच्चों के साथ पढ़ें।कितना सटीक रास्ता है मगर यह जनता के हाथो चुनी सरकार अपने बच्चों को जनता के साथ नहीं बिठाना चाहती।हमारे वरिष्ठ साथी संदीप पाण्डेय एक हफ्ते से अनशन पर हैं इन मांगो को लेकर।मुख्यमंत्री मिलकर भी निराश कर चुके हैं।यह कोई हवा का मुद्दा नही है।करीब छः महीने पहले उच्च न्यायालय राज्य सरकार को समान शिक्षा प्रणाली लागू करने का आदेश दे चुका है।मगर यह आदेश नौकरशाही के सामने बौना साबित हुआ है।सन्दीप भाई आम लोगो के लिए इस तपिश में संघर्ष कर रहे हैं।मौका है उनके साथ आने का।हर अच्छी कोशिश को बढ़ावा देने का।दिन रात सरकार को कोसने से बेहतर है उसपर दबाव बनाए।गाँधी प्रतिमा पर हफ्ते से बैठे सन्दीप भाई को ऊर्जा दे।जो जहाँ है वहां से बराबरी की आवाज़ बुलन्द करे।आज निकलिए कल संवारने के लिए।जब कोई अच्छा काम करे तो उसके साथ कन्धे से कन्धा मिलाना हम सबका कर्तव्य है।गरीबो को टॉफी,कम्बल,खाना दे देना बड़ा आसान है मगर उन्हें सबके बराबर लाना बड़ा कठिन।बराबरी के इस बुनयादी काम का हिस्सा बन जाइये।कम से कम इस बराबरी को लागू करने का हिस्सा ही बन जाइये।यह नारा हमारी ज़बानों पर होना ही चाहिए
चाहे अमीर की हो या गरीब की संतान।
सबको शिक्षा एक समान।।।।।।।।

No comments:

Post a Comment