इतना भी कोई घूरता है।सारे मेहमानो में तुम टकटकी बाँधे मुझे ही घूरे जा रही थी,सोचो सबके बीच हम कितनी आँखे झुका तुम्हे देख पा रहे थे।पूरा खानदान बैठा था और तुम हमारी सिर्फ हमारी ही प्लेट में सब भरे जा रही थी।पापा ने एक बार आँख उठा तुमको फिर हमको देखा था,वही वक़्त वह पनीर का बड़ा सा निवाला गले में फंस गया था।कमबख्त की मार पानी के लिए झट से तुम्ही ने हाथ बढ़ाया था।अच्छा इतने लोगो में सिर्फ हम पर नज़र रखते हुए तुम्हे ज़रा भी शर्म नही आई।तुम्हे वह याद है जब जाते हुए तुमने शरारतन मेरी सफेद शर्ट पर कोल्ड्रिंक गिराई थी,आज भी तुम्हारे फूहड़पन का धब्बा उसपर लगा हुआ है।कभी कभी सोचता था की तुम्हे केकड़े और झींगा खाकर पैदा किया गया होगा।मेरी ऑरकुट प्रोफाइल की तो तुमने बैंड बजा रखी थी।ऑनलाइन फब्तियों की यह पहली फसल थी अच्छा है फेसबुक से पहले तुम कहीं और बुक हो गईं।वोह सोचो जब तुम्हारी अथाह कोशिशो से खुश होकर जब हमने कहा था की तुम जो बताओ वह बाजार से ला दूँ तो तुमने पूरा परचा थमा दिया था।मुझे आजतक वह दिन नही भूलता जब तुमने मुझसे उस दिन मंगवाया क्या था,सेनेटरी पैड।बेवक़ूफ़ जैसा मैं मेडिकल स्टोर पर खड़ा केमिस्ट की हल्की मुस्कान को समझने की कोशिश कर रहा था।तुम्हे और कुछ नही मिला था मंगवाने को।शरारतन जब उसने पूछा लार्ज या मीडियम तो जी चाहा कह दें लिहाफ के इतने देदो जिसमे मुँह धर हम मर जाए।तुम कितनी फ़ूहड़ थी,सबके सामने ऐसे देखती थी की कुत्ते बिल्ली भी शर्मा जाए।सोते में पूरी चादर उलट देती थी,यह बेहयाई शायद ही किसी ने की हो।उसी वक़्त तुम्हे दफ़ा कर देते मगर चुहलबाज़ी में जो मज़ा था तो था ही।उस वक़्त पहली बार सीधे इश्क के इलज़ाम लेकर फंसे थे मगर तुम इतनी बेमुरव्वत भी थीं की एक रात झट से कह कर निकल ली की वह सब भूल जाओ,मेरी शादी तय हो गई।बद्तमीज़,ज़रा भी तमीज़ नही थी।वैसे भी कौन तुम्हारी जैसी फ़ूहड़ के साथ रहता।निकल ली अच्छा किया वरना तुमसे पीछा छुड़ाने का कोई बहाना ही नही सूझ रहा था।©
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