Sunday, June 19, 2016

आशिक़ी सप्तम

हाँ तो मैं क्यों न रोऊँ।कैसे इन आँखों को समझाऊँ।तुम ही तो हो इनकी वजह।मुझे याद है जब तुम हमारे साथ चुपके चुपके टिफिन शेयर करती थीं।जबकि तुम्हारा भाई मेरे ही क्लास में था।कितना रिस्क लेती थीं।मेरे लिए तुमने सारी खुशियाँ लाकर रख दिया।यहाँ तक जब तुम्हारी माँ मरी तब भी तुमने हमे बड़ी लापरवाही में बताया की मुझे गम न हो।उस वक़्त तुम मेरे सामने फ़फ़क कर रो सकती थीं।नही रोई।जब तुम्हारा मेरे हमउम्र भाई मरा तब भी तुम खामोश रहीं की कहीं मुझे दुःख न हो।तुम मेरा हर पल खुशियो से भर देना चाहती थीं।स्कूल की पीटी में तुम मेरे सामने खड़ी होती की कहीं मैं गलत न कर दूँ।मेरी ज्योग्रफी की कॉपी के सारे फिगर तो तुमने ही बनाए थे,वही तो मेरा भूगोल था।इंटरवल में खीरे में नमक तुम ही तो लगाकर खिलाती थीं।फील्ड की हरी घास के निशान जब मेरी सफेद पैंट के घुटनो में लग जाते,तो तुम ही तो उस पर नीबू घिस घिस निशान मिटाती।मैं दावे से कह सकता हूँ होली की पहली गुझिया भी तुम्हारे हाथ से ही खाई थी।पेपर में जब ब्लैक पेन की रिफिल खत्म हो गई तो तुमने अपना पेन चुपके से मेरी पीठ पर फेका था,वह मेरे पास आज भी है। मैं वह भुने मटर के दाने कैसे भूल सकता हूँ जो तुम सफेद दुपट्टे में छुपा कर लाती थीं।तुम्हारे साथ कभी लगा ही नही की हम दोनों अलग हैं।तुम पण्डित थीं, लगा हम खुद पण्डित हैं।मज़ाक मज़ाक में पूरा हनुमान चालिसा और दुर्गा की आरती तुमने याद करवा दिया।आज मायूस बिखरे हुए दिल से पूँछ रहा हूँ की जब इतनी मोहब्बत थी तो क्यों छोड़ा।सब कुछ पता है।ऐश्वर्या सलमान की सज़ा मुझे मिली।तुम्हारे बाप ने उस वक़्त मुम्बई में बैठे सलमान और ऐश्वर्या के किये धरे की सज़ा हमें दी।तुम भी चुप चाप मिश्रा परिवार में चली गई।अथाह मोहब्बत को कमबख्त सलमान की गलती भुगतनी पड़ी।जाते जाते जान लो मैं आज भी पूरी पण्डित बिरादरी से मोहब्बत करने लगा हूँ।मुझे वह अपने लगते हैं।बेहद अपने।©

No comments:

Post a Comment