Thursday, June 2, 2016

उठ जाओ ना

हज़रत दाऊद यानि डेविड जो मौसिकी के माहिर थे,बादशाह हुए तो धीरे धीरे अवाम में सुकून आ गया और वह खुशहाल हो गई। जब हज़रत दाऊद के बाद सुलेमान बादशाह बने।तब भी सुकून रहा,फिर एक सुबहों सुलेमान ने खुद को तख्त पर मरा हुआ देखा तो बेचैन होकर आसमान की तरफ देखा और कहा यह क्या है मेरे ख़ुदा।आसमान से आवाज़ आई की ऐ सुलेमान तुम्हारा और तुम्हारी अवाम का इम्तेहान शुरू होने वाला है, लोगो में उतर जाओ और उन्हें तैयार करो।तो सुलेमान पूछते हैं क्या कोई बीमारी,महामारी फैलने वाली है या कोई दूसरा बादशाह हमलावर होने वाला है तो ऊपर से आवाज़ आती है तुम्हारी अवाम से सब्र और मोहब्बत को कम कर दिया गया क्योकि इसी को बढ़ाना एक पैगम्बर का काम है।इसके कम होने के बाद दूसरी किसी महामारी या दुश्मन की ज़रूरत नही।तो जाओ और इसकी कमी से होने वाली परेशानियो को देखो और सम्भालो और अपनी सलाहियतों से निपटाओ।हैरान परेशान सुलेमान शहर में निकलते हैं, उन्ही के सामने उनकी मोहब्बत और सुकून पसन्द अवाम आपस में लड़ पड़ती है।भाई भाई को मारने लगता है।जानवरो के नामपर भाइयो के खून से सुलेमान नहा जाते हैं।औरते कपड़े फाड़ फाड़ कर ज़ुल्म की दास्ताँ सुना हमलावर होती हैं।अपने कबीले से अलग कबीलो के घरो में आग लगा दी जाने लगी।दुसरो की पवित्र किताबो पर लोग पैर रख रख नँगा नाच करने लगे।यहाँ तक किसी लड़के की मामूली शरारत पर उसकी बहन का सैकड़ो वहशियों ने बलात्कार कर डाला।सुलेमान अवाम का यह चेहरा देख डर गए।सुलेमान देखते हैं कुछ को तो उनका वहाँ होना इतना बुरा लगता है की उन्ही पर हमला कर देते हैं।सुलेमान भरी आँखे और ग़मज़दा दिमाग लेकर महल के उसी तख्त पर गिर पड़ते हैं।अजब तबाही जो महामारी,हमलो से भी बुरी थी।माँ के सामने उसी के नाम पर बेटों, भाइयो को क़त्ल किया जाने लगा।लोगों में ज़रा भी धैर्य और मोहब्बत नही रही।सुलेमान ने उजड़ते हुए गुलशन को देखा और सोचा की दो मामूली सी चीज़ें सब्र और मोहब्बत कम क्या की गई इंसान एक झटके में वहशी जानवर हो गया।वह सुलेमान थे जो अरसे बाद सब सम्भाल ले गए।हम सोचे की यह जो हमारे आँगन में सब्र और मोहब्बत तंग हो गई है उससे कैसे निपटें।अपनी चौखट पर भाई को भाई नँगा करके मारे तो उससे कैसे निपटें।इंसान जब शैतान का रूप धर ले तो उसे कैसे काबू करें।अब अबाबील का दस्ता नही आएगा दोस्तों उठो और बिल्कुल मत घबराओ,हमेशा एक वक़्त के बाद ज़ुल्म ही शिकस्त खाया है।मोहब्बत और सब्र में इतनी ताक़त है की हर ज़ुल्म को वह घुटनो के बल बैठा देगा।उठकर अपने रास्ते खुद बनाओ।कंकर,काँटे,कीचड़ से रास्ता खुद साफ करो,ताकि हिंदुस्तान का मुस्तक़बिल हमारे तुम्हारे सबके बच्चे ख़ुशी ख़ुशी बेझिजक नँगे पैर खेल कूद और चल सकें।©

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