Sunday, May 1, 2016

छदम् नारीवाद

क्या मैं आपको बहन कह कर बुला सकता हूँ।नहीं।बहन ही क्यों कहोगे,हक़ जाताना है मुझ पर।अर्रे नही अच्छा आपा या आपी कह लें।हरगिज़ नही क्या जताओगे की मैं तुमसे बड़ी हूँ,खूब समझती हूँ तुम लोगों को।अब आप भी ना,अच्छा नाम लेकर बुलाऊ।तुम तो यही चाहते हो किसी भी तरह हम लोगों को नीचा दिखा सको,नाम लेकर ही सही तुम्हारे इगो को जगह मिल जाए।अर्रे अर्रे मेंरी अम्मा क्या करें।तुमने फिर औरत को घसीटा,अम्मा को बहस में ले आए, तुम पुरुष नही सुधरोगे।अर्रे मेंरे बाप आइंदा से क्या कह कर बुलाऊँ।फिर आखिर पुरुष के ख़िताब से नवाज़ ही दिया,तुम्हे लगता है बाप ही सबसे मज़बूत हो सकता है।बाप कह कर तुम मुझ पर क्या साबित करना चाह रहे हो।मैं बड़ी नारीवादी हूँ, अपने मान सम्मान के लिए हर एक को ललकार सकती हूँ।।।।जी और मैं नारीभक्त।।।आ गए ना असली शक्ल में,खूब समझती हूँ भक्ति,दिखाने के लिए भक्ति और बन्द कमरों में ज़ुल्म,यही पहचान है तुम पुरषो की।अरे चाची बख्श दो,छोड़ दो मुझे बात ही नही करनी।।हाँ हाँ हर पुरुष के लिये मुझ जैसी घोर नारीवादी की ही ज़रूरत है।जी बिल्कुल वैसे भी अब हम सौ गज दूर ही रहेंगे।माफ़ कर दियो सरकार।नही करना महिला सशक्तिकरण ओह सॉरी ओनली सशक्तिकरण।

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