Wednesday, May 11, 2016

रुक जाओ।बढ़ जाओ।

जो देश इतिहास की वीरता को ही उभारने में लगा रहे या जिस देश के वैज्ञानिक इतिहास के महापुरुषों की वैज्ञानिक सोच कोही साबित करने में लग जाए उसकी तरक़्क़ी पर शक है।हो सकता है आपको बुरा लगे।हो सकता है मैं किसी पार्टी का एजेंट लगूँ।हो सकता है मैं आपकी तरह वैचारिक न हूँ फिर भी सिर्फ़ इतना की सब कुछ भूलकर मेहनत करो।पुराने स्वर्णिम इतिहास को देख देख डकारें मत लो।तुमसे पँचर जुड़ता है तो वह भी इस सलीक़े से जोड़ो की जुड़वाने वाले को पलट कर इस पर वक़्त बर्बाद न करना पड़े।चाय बेचते हो तो ऐसी बनाकर बेचो की किसी के खून पसीने की कमाई तुम्हारी चाय पीकर सुआरत हो जाए।तुम जो भी करते हो वह सिर्फ मुल्क़ की बेहतरी के लिए हो।पढ़ो तो वह पढ़ो जो तुम्हारी आने वाली नस्लो की ज़िन्दगी को आराम पहुँचाए।लिखो वह जो आने वाले दौर की रौशनी बने।मैं बार बार कहता हूँ,हो सकता है पागल होऊं।मगर दोस्त जब बिलखते बच्चों,तड़पते नौजवान,लुढ़कते बूढ़ों को देखता हूँ तो जी करता है क्या करूँ की यह ज़िन्दगी आसान हो जाए।मत बकको नेताओं को,मत मांगो कमर से झुके अफसरों से,तुमसे हो सके,तुम महसूस कर सको तो दोस्त मुल्क़ की आवाज़ सुनों।जो भी कर रहे हो वह बेहतर,ईमानदारी और मोहब्बत से करो यही मुल्क़ चाहता है।यही दुनिया के सारे मुल्क़ चाहते हैं।जिन्हें धर्म,जाति,पार्टी,संगठन,सोच,विचारधारा से अलग नही चलना है वह भक्तिभाव में डूबे रहें।बाकि जो भारत को महसूस कर सकें वह आज से अभी से कल बनाने में जुट जाए।

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