एक थे बुढ़ऊ,अर्रे सॉरी बुढ़ऊ तो न ही कहें।हाँ ज़ईफ़ से एक थे।इतने ज़ईफ़ थे की लग रहा था मल्कुलमौत(यमराज) से उनकी उम्र की हिसाब किताब वाली फाइल गुम गई।यह मल्कुलमौत भी हद दर्जे की लापरवाह है।चचा किसी तरह मरने में नही आ रहे थे।एक आध बार लगा की यह मरेंगे तो हैं नही,हाँ बल्कि इनके पर निकल आएंगे और यह दूर हवा में उड़ जाएँगे।बकवास।पर के परपोते हो गए मगर वह न उड़े।ए के हंगल इनके सामने जवान थे जिन्हेंपूरी फ़िल्म इंडस्ट्री ने कभी जवान न देखा।एक दिन उनका ज़िक्र चला तो हमने कह दिया लगता है मियाँ सिरके में डाल दिए गए हैं।खत्म ही नही हो रहे।इतना कहना भर था की लानत मलामत का दौर शुरू हो गया।कहीं कोई मरने की बात करता है।अब कौन समाझाए मरना तो प्रकृति है, उन्हें तो मरना ही है, गम काहे का।हम सब मरेंगे तो क्या यह सोच कर रोने लग जाएँ।अरे मौत है कोई बवंडर थोड़े ही,जब आ जाएगी पैजामे की मोहरी चढ़ा कर निकल लीजियेगा।मौत को इतनी संजीदगी से लेते हैं जैसे ज़मीन के सारे मसले इन्हें ही सुलझाने हैं।अरे माँ बाप भाई बहन दोस्त और सभी को मरना है, जब मरे हल्का सा दुखिया लीजिये बस।जब मरने वाला आपको छोड़ गया तो आप भी छोड़िये ना।कुछ तो मौत की बात से इतना डरते हैं जैसे मल्कुलमौत उन्ही की ज़बान की तरफ ताक लगाए बैठी है।अरे तुम दिन रात बक्को, डरो मौत से वह जब आएगी तब आएगी अभी से काहे मिमिया रहे हो।वैसे भी टेंशन मत लें किसी के मरने के गम में कोई नही मरता।मरे हुए का मासूम सा चेहरा देखिये और हौले से मुस्कुराकर आगे बढ़िए।कितना खुश है जो निकल गया।देखो उन बुढ़ऊ अर्रे ज़ईफ़ चचा को मलकुल मौत पूछ भी नही रही।यमराज का सबसे बुरा प्रदर्शन यहीं हैं।हमे तो लगता है उनकी गुज़र चुकी बेगम कब्रिस्तान में सुकून से रहने की दुआ कर रही हैं।नेक थी इसी लिए चचा को कब्रिस्तान का टिकेट मिल नही रहा।हमे तो इतनी बेचैनी है की एक बार उन्हें मरता हुआ देख पाए।बहुत बार पान मंगवाया है भरी दोपहर में।लगता है वह सिरके में पड़े रहेंगे और हम ही सरक जाएँगे।©
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